बैटरी स्क्रैप कारोबारी के प्रतिष्ठानों पर डीजीजीआई का छापा दूसरे दिन शनिवार को भी जारी रहा। अफसरों को चार करोड़ से ज्यादा की कर चोरी के दस्तावेज हाथ लगे हैं। स्क्रैप में फर्जी बिलिंग के भी सुबूत मिले हैं। कई इकाइयां बिना पंजीकरण के संचालित मिली है। कर चोरी का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
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डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) रीजनल यूनिट कानपुर की नाै से ज्यादा टीमों ने शुक्रवार को पनकी साइट तीन स्थित एएस इंटरप्राइजेज और एसके इंटरप्राइजेज के प्रतिष्ठानों पर सुबह सात बजे छापा मारा था। सूत्रों ने बताया कि यहां रात 11 से सुबह चार बजे तक बैटरी का स्क्रैप निकाला जाता है। स्क्रैप व अन्य उपकरणों की मदद से नई बैटरी बनाई जाती है। यह काम लंबे समय से किया जा रहा था। विभाग के अधिकारी इस पर लंबे समय से नजर रख रहे थे।
कर चोरी के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद एक साथ कार्रवाई की गई। यहां पर दो फैक्टरियों के पंजीकरण का पता चला है, जबकि तीन अन्य का पंजीकरण नहीं मिला है। छापे के दौरान बड़े पैमाने पर स्क्रैप और तैयार बैटरी मिली। इस संबंध में कोई भी दस्तावेज नहीं मिले। सूत्रों ने बताया कि स्टाक और तैयार माल में अंतर मिला है। सही जानकारी भी नहीं दी जा रही है। टीमों ने कंप्यूटर, लैपटॉप जब्त कर लिए हैं। स्क्रैप और तैयार माल के स्टाक का मिलान किया जा रहा है। अब तक चार करोड़ से ज्यादा की कर चोरी के दस्तावेज मिले हैं।