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Kanpur: टैक्स बार एसोसिएशन की गोष्ठी, वक्ता बोले- संशोधित आय को रिटर्न में घोषित करना होगा, इन पर भी चर्चा

Fri, 07 Aug 2026 09:07 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

Kanpur News: लखनपुर स्थित सभागार में शुक्रवार को टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से आयकर विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कर विशेषज्ञों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के आयकर रिटर्न, टैक्स ऑडिट, टीडीएस और एमएसएमई से जुड़े प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी देते हुए करदाताओं को समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी।
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विशेषज्ञों ने आयकर रिटर्न और टैक्स ऑडिट के नियम समझाए - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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लखनपुर में टैक्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने बताया कि व्यापार और पेशे से आय वाले करदाताओं को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 31 अगस्त तक रिटर्न दाखिल करना होगा तथा रिटर्न में संशोधित आय की घोषणा करनी होगी।

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कानपुर में टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को लखनपुर स्थित सभागार में आयकर टैक्स पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि व्यापार एवं पेशे से आय होने पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के आयकर रिटर्न 31 अगस्त तक दाखिल किये जाने हैं। संशोधित आय को रिटर्न में घोषित करना होगा। करदाता को इस गणना में विशेष सावधानी बरतनी होगी।

मुख्य वक्ता, कर विशेषज्ञ संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि कारोबारी एवं पेशे से आमदनी धारा 44 एबी के तहत अनिवार्य टैक्स ऑडिट के दायरे में है। तब सितंबर तक ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। ऐसे आयकरदाताओं के रिटर्न अक्टूबर तक दाखिल होंगे।

लाभ-हानि खाते में प्रदर्शित आय या हानि को आयकर नियमों के तहत गणना की जाएगी।उन्होंने बताया कि टीडीएस कटौती यदि रिटर्न दाखिले की देय तिथि तक जमा नहीं कराया जाएगा। तब उस खर्चे की छूट आमदनी की सकल आय से 70 प्रतिशत ही छूट मिलेगी। इसी तर्ज पर साझेदारों को ब्याज एवं पारिश्रमिक की खर्च छूट तभी प्राप्त होगी।

जब टीडीएस धनराशि आयकर रिटर्न दाखिल करने की देय तिथि तक जमा करा दी जाएगी। अन्यथा 70 फीसदी ही छूट मिलेगी। एमएसएमई. के निर्माता पंजीकृत व्यापारी से खरीद पर भुगतान 15 दिन एवं अनुबंध पर अधिकतम 45 दिन में करना होगा। अन्यथा खरीद खर्च की छूट नहीं मिलेगी। भुगतान किये जाने वाले वित्तीय वर्ष में ही छूट मिलेगी।
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अन्य खर्चों एवं कारोबारी संपत्तियों पर डेप्रिसिएशन छूट आयकर की दरों एवं शर्तों के अनुसार संशोधित करना होगा। एकेडमिक सेल के चेयरमैन दिनेश प्रकाश ने बताया कि पुराने आयकर कानून की विसंगतियों और परेशानियों को आयकर कानून 2025 में भी समाप्त नहीं किया गया है। कारोबारी हितों की सरकार ने अनदेखी की है।
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