पदकों को देखकर तारीफ करते नहीं थकते हैं लोग
इसके बाद से उन्होंने जैनब को प्रशिक्षण देना शुरू किया। शुरुआती दिनों में बेटी के दौड़ने पर तरह-तरह के सवाल उठाने वाले लोग अब उसके पदकों को देखकर तारीफ करते नहीं थकते हैं। उन्होंने बताया कि दंगल फिल्म दिखाकर और खिलाड़ियों की जीवनी पढ़ाकर बेटी को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने हमेशा समझाया कि बेटियां, बेटों से किसी भी मामले में कम नहीं होती है।
लगातार दौड़ने की क्षमता अधिक
कोच दिनेश भदौरिया ने बताया कि जैनब में लगातार दौड़ने की क्षमता अधिक है। तकनीक के साथ उसकी क्षमता ही उसे अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है। उसकी ज्यादातर जीत बड़े अंतर की होती है। जैनब नगरनिगम बालिका विद्यालय चुन्नीगंज की छात्रा है। प्रधानाचार्य नीता सिंह ने छात्रा को यूथ ओलंपिक गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि छात्रा ने यह मुकाम सीमित संसाधनों में प्राप्त किया है।
पिता दुकान में करते काम
जैनब के पिता मो. हनीफ एक दुकान में काम करते हैं। इससे उनकी आर्थिक अच्छी नहीं है। इससे बेटी को बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण से जूझना पड़ रहा है। हालांकि पिता को लगातार प्रतियोगिताओं में बेहतर करने वाली अपनी बेटी से देश के लिए खेलने की उम्मीद है।