एक दिन में एक लाख रुपये तक की वसूली
अन्य कर्मचारियों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था लेकिन मंगलवार को कोई नहीं पहुंचा। एडीसीपी ऑपरेशन सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि निजी कंपनी को ट्रायल रन सेंटर का ठेका मिला था। कंपनी ने सेंटर की जिम्मेदारी हरेंद्र को सौंपी थी हालांकि वह दलालों का सरगना बन गया। बिना ट्रायल रन के वह लोगों को पास कर देता था। एक दिन में एक लाख रुपये तक की वसूली कर ऊपर से लेकर नीचे तक बैठे लोगों को रुपये पहुंचाता था।
मोबाइल से खुलेगा सिंडीकेट का राज
पुलिस के मुताबिक पकड़े गए दलालों के मोबाइल फोन में कई लोगों के आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों के दस्तावेज मिले हैं। इनकी जांच और डेटा एकत्र करने के बाद सिंडीकेट में शामिल लोगों, उनके काम और रोजाना होने वाली कमाई का ब्योरा सामने आने की उम्मीद है।
आरटीओ कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे होंगे चेक
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरटीओ कार्यालय में बैठने वाले बाबुओं के दफ्तर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं हालांकि परिसर में कैमरे लगे हैं। ऐसे में पुलिस बीते महीनों की डीवीआर जब्त कर कार्यालय आने और जाने वालों की जांच करेगी। एक ही दिन में कई बार चक्कर लगाने वालों को चिह्नित किया जाएगा।
पकड़े गए 11 दलाल जमानत पर छूटे
पुलिस ने सोमवार को आरटीओ दफ्तर से दलाल वीरेंद्र बहादुर, सौरभ तिवारी, दिलीप कुमार सिंह, विशाल अवस्थी, रामचंद्र शुक्ला, बृजमोहन नेगी, विपिन गुप्ता, आदेश कुमार, मनीष गौतम, कमल धारिया और धर्मेंद्र दिवाकर को पकड़ा था। इन सभी को मंगलवार को काकादेव थाने से जमानत पर छोड़ दिया गया।