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UP: पापा…ये दुनिया हमारे लिए नहीं और शौर्य ने दे दी जान, पिता बोले- पहली बार रात में शांत रहा, कही थी ये बात

Thu, 15 May 2025 06:30 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: मृतक के पिता ने बताया कि तीन दिन पहले ही बेटे ने कहा कि पापा यह दुनिया हमारे लिए नहीं है। उस समय नहीं पता था कि इसने कोई और तैयारी कर ली है। कई दिनों से वह शांत भी रह रहा था। धार्मिक और ऐतिहासिक किताबें पढ़कर समय बिताता था।
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मृतक की फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में मंगलवार को घोषित सीबीएसई की दसवीं परीक्षा फर्स्ट डिविजन पास करने वाले छात्र शौर्य वर्मा (14) ने बुधवार सुबह घर के कमरे में नायलोन की रस्सी से फंदा लगा कर जान दे दी। सुबह उसे जगाने पहुंची मां ने बेटे के कमरे को खुलवाने के लिए खटखटाया लेकिन वो नहीं खुला।

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इसके बाद परिवार और पड़ोसियों की मदद से दरवाजे को तोड़ा तो फंदे के सहारे पंखे के कुंडे से बेटे को लटका देखा तो उनकी चीख निकल गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों के अनुसार वह एक दिन पहले रस्सी खरीदकर लाया था।

आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं
पूछने पर जरूरी काम होने की बात कहकर टाल गया था। आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हैं। काकादेव के हितकारीनगर निवासी ओम प्रकाश शर्मा वेलफेयर मिशन स्कूल में शिक्षक हैं। परिवार में पत्नी रमा और तीन बेटे लव, अंशुमान व सबसे छोटा बेटा शौर्य था।

एक दिन पहले ही सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा पास की
बड़ा बेटा लव एयरफोर्स में इंजीनियर हैं, जिनका पहलगाम में आतंकी घटना के बाद जम्मू तबादला हो गया है। मझला बेटा एक स्कूल में शिक्षक है। शौर्य ने एक दिन पहले ही सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा पास की है। पिता ने बताया कि मंगलवार रात बेटा उनके साथ ही सोया था।

शौर्य पहली बार रात में शांत रहा
मगर हर समय आध्यात्मिक बातें करने वाला शौर्य पहली बार रात में शांत रहा। सुबह उसके जगने से पहले वह स्कूल चले गए थे। वहीं, फोन पर सूचना मिली की शौर्य का कमरा अंदर से बंद हैं। पीटने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिल रहा है। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़कर लोग अंदर घुसे तो देखा वह फंदे से लटका था।

पापा ये दुनिया हमारे लिए नहीं है
पिता के अनुसार तीन दिन पहले ही बेटे ने कहा कि पापा यह दुनिया हमारे लिए नहीं है। उस समय नहीं पता था कि इसने कोई और तैयारी कर ली है। कई दिनों से वह शांत भी रह रहा था। धार्मिक और ऐतिहासिक किताबें पढ़कर समय बिताता था। उसे गीता की पूरी जानकारी थी। उसे मोबाइल का शौक नहीं था न ही दोस्तों संग मौज-मस्ती करना पसंद था।

शौर्य को फंदे से उतारकर हॉस्पिटल ले गए
पार्क के एक कोने में अकेले बैठकर चिंतन करना, रामायण, गीता और ऐतिहासिक पुस्तकें पढ़ने में उसकी। चाचा धर्मेंद्र व राजेंद्र भी अपने परिवार के साथ उसी मकान में रहते हैं। राजेंद्र ने बताया कि घटना के समय घर में सिर्फ महिलाएं ही थीं। शौर्य को फंदे से उतारकर निजी हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
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बच्चे पलायनवाद की बाद करें तो सतर्क हो जाएं। वे अंदर ही अंदर किसी नकारात्मक विचार में घुलते रहते हैं। इससे दुनिया को लेकर उनमें नैराश्य पैदा हो जाता है। ऐसी मानसिक स्थिति में सब बेमानी लगने लगता है और घातक कदम उठा लेते हैं। बच्चों को घरवाले प्रोत्साहित करें। उन्हें कार्य के लिए प्रेरित करें। बच्चों के सोच में नकारात्मकता न आने दें।  -डॉ. धनंजय चौधरी, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष मनोरोग विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
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