ऐसे में महिलाओं को डरकर पीछे हटने के बजाय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और आत्मविश्वास के साथ हर चुनौती का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएं हिंसा के डर से खुद को घरों में कैद न करें, बल्कि अपना आत्मबल बढ़ाएं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।
उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। साथ ही परिवार और समाज को भी ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां महिलाएं बिना भय के अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें।
कार्यक्रम में डॉ. लक्ष्मी सहगल के स्वतंत्रता संग्राम, समाज सेवा और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में दिए गए योगदान को भी याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।