कोलकाता में डॉक्टर के साथ अमानवीयता और हत्या की घटना के खिलाफ जूनियर डॉक्टर हड़ताल के छठवें दिन सड़कों पर उतरे और लोगों को पत्रक बांटकर समर्थन मांगा। डॉक्टरों ने हैलट, जेके कैंसर और दूसरे अस्पतालों की ओपीडी बंद करा दी। हड़ताल से अस्पतालों में रोगी कम आए। जो आए वह भी बगैर दिखाए लौट गए। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं। हैलट में ओपीडी चैनल के बाहर जूनियर डॉक्टर बैठे रहे। प्राचार्य डॉ. संजय काला और उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि ने रोगियों को देखा।
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हैलट ओपीडी में रोगी पर्चा काउंटर बंद करा दिया। इसके साथ ही चैनल बंद कर दिया। पैथोलॉजी के बगल के रास्ते से जो रोगी जा पाए, उन्हें हाथ से पर्चा बनाकर देखा गया। बहुत से रोगी पर्चा काउंटर बंद देखकर लौट गए। प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि उन्होंने 50 रोगियों को ओपीडी में देखा। रोगी पर्चा अपने हाथ से बनाकर दिया। जूनियर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज गेट के बाहर सड़क पर प्रदर्शन किया। इसके बाद जुलूस बनाकर जेके कैंसर और कार्डियोलॉजी गए।
ओपीडी में दिखाने आए कैंसर रोगी लौट गए। कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. एसएन प्रसाद ने बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी में 10 रोगी देखे गए और एक रोगी को भर्ती किया गया है। कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में जूनियर डॉक्टरों ने कोलकाता की डॉक्टर के हत्यारों का पुतला फूंका। इस दौरान डॉक्टर ‘वी वांट जस्टिस’, ‘हत्यारों को फांसी दो’, ‘शौक नहीं मजबूरी है-ये हड़ताल जरूरी है’ आदि नारे लगाते रहे। ओपीडी में कैंसर रोगियों को दिखाने के लिए आए परिजन मायूस लौट गए। तीमारदारों का कहना था कि डॉक्टरों ने जांच रिपोर्ट तक नहीं देखी। परिजन रोगियों को लेकर अस्पताल परिसर में लेटे रहे।
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हैलट के आईसीयू, एचडीयू फुल
प्राचार्य डॉ. काला ने बताया कि इमरजेंसी में रोगी भर्ती किए जा रहे हैं। इमरजेंसी के दोनों आईसीयू और एचडीयू के बेड फुल हैं। वेंटिलेटर वाले बेड भी फुल हैं। मेडिसिन के आईसीयू के 20 बेड भरे हैं। इसके अलावा 15 बेड का दूसरा आईसीयू है, वह भी फुल है। एचडीयू 15 बेड का है, उसके भी सभी बेड भरे हैं।
अस्पतालों और सीएचसी में बढ़े रोगी
मेडिकल कॉलेज के हैलट और संबद्ध अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भीड़ बढ़ने लगी है। अस्पतालों और सीएचसी पर 20 फीसदी रोगी बढ़ गए हैं। जो रोगी हैलट में दिखाने आते हैं, उन लोगों ने अपने स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराई। सीएमओ डॉ. आलोक रंजन का कहना है कि सीएचसी, पीएचसी और दूसरे अस्पतालों में रोगी देखे जा रहे हैं। जांचें भी हो रही हैं।
डॉक्टरों की हड़ताल, मरीजों को नहीं मिला इलाज
- हैलट जच्चा बच्चा में गर्भवती महिलाएं इलाज के लिए परेशान रहीं। कैंट, कल्याणपुर, शिवराजपुर और बिल्हौर से ओपीडी पहुंची। लेकिन ओपीडी न चलने से मायूस होकर लौट गईं।
- डफरिन महिला चिकित्सालय में सीएचसी से आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। ओपीडी भी समय से शुरू होकर देर तक चल रही है। पैथोलॉजी सेंटर में भी काफी भीड़ पहुंच रही है।
- उर्सला अस्पताल की ओपीडी में अब रोजाना तीन हजार से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। पहले 50 से 55 मरीज भर्ती होते थे अब करीब 90 मरीज भर्ती हो रहे हैं। ऑपरेशन की संख्या भी बढ़ी है। अस्पताल में साढ़े चार सौ बेड फुल हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से डॉक्टर और स्टॉफ का अवकाश नहीं दिया जा रहा है। मरीजों को बेड के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि हड़ताल का असर उर्सला अस्पताल पर भी है। दोगुने मरीज अस्पताल में हो गए हैं।