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कानपुर: घाटमपुर में सचिवों की हड़ताल से समितियों पर ताले, महंगी खाद खरीदने को मजबूर किसान, कही ये बात

Fri, 23 Oct 2026 02:42 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: घाटमपुर क्षेत्र में सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से तालों के लटकने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रबी फसलों की बुवाई के इस सीजन में डीएपी और अन्य खादों की जरूरत के चलते किसानों को मजबूरन खुले बाजारों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है।
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मनमाने दामों पर बिक रही डीएपी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर के घाटमपुर में सचिवों की हड़ताल के चलते सहकारी समितियों में लटकते तालों ने किसानों की बेचैनी बढ़ा दी है। फसलों की बुवाई के लिए उन्हें दुकानों की शरण लेनी पड़ रही है। उन्हें मजबूरन महंगे दामों में खाद खरीदना पड़ रहा है। वहीं दुकान वालों ने भी अपने अलग-अलग भाव लगाकर मौके का लाभ उठाया जा रहा है।

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मालूम हो कि नियमित वेतन समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदेश भर की सहकारी समितियों की बृहस्पतिवार से हड़ताल शुरू हो गई है। इसके चलते समितियों में तालाबंदी हो गई है। उधर किसानों ने लाही, सरसों, चना, व मटर आदि की बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्हें खाद की आवश्यकता पड़ रही है।

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किसान बोले- मजबूरी में खरीद रहे हैं

खाद के लिए  मजबूरन दुकानों का रुख करना पड़ रहा है। मौजूदा समय डीएपी की जरूरत है। समितियों से मिलने वाली खाद की विश्वसनीयता को लेकर जहां किसान आश्वास्त रहते हैं। वहीं बाहर मिलने वाली खाद में मिलावट का भी उन्हें शक रहता है, मगर मजबूरी में खरीद रहे हैं।
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एनपीके खाद की बोरी 1350 रुपये की है
समिति में मिलने वाली डीएपी व एनपीके खाद की बोरी 1350 रुपये की है, जबकि दुकानों में डीएपी 1800 रुपये की है। वहीं, उस क्वॉलिटी की एनपीके मिल ही नहीं रही है। जो मिल रही हैं वह काफी महंगी हैं। सरगांव के बलजीत सिंह यादव, रैपुरा के विनोद सचान, घुरऊपुर के राम स्वरूप आदि किसानों ने बताया कि खेत तैयार हैं। विश्वसनीय न होने के बावजूद दुकानों से महंगी खाद खरीदने की मजबूरी है।
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