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कानपुर फर्जी मुठभेड़: 10 घंटे बाद पुलिस ने खड़े किए थे चश्मदीद, चालक-क्लीनर से कराई थी गवाही, CBCID करेगी जांच

Tue, 20 Oct 2026 09:00 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: महाराजपुर में 35 साल पहले हुए फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले में सीबीसीआईडी की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस की बड़ी लिखापढ़ी की लापरवाही उजागर हुई है। पुलिस ने कागजों में मुठभेड़ का समय रात एक बजे दिखाया था, जबकि गवाह बनाए गए डीसीएम चालक उमाशंकर और क्लीनर बृजेंद्र सिंह से कागजों पर हस्ताक्षर 10 घंटे बाद कराए गए थे।
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पीड़ित राकेश के बड़े भाई देव प्रसाद और महाराजपुर थाना - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में पुलिस अक्सर मामलों की लिखापढ़ी में लापरवाही करती है। 35 साल पुराने मुठभेड़ के मामले में उसकी यह लापरवाही आज 12 पुलिसकर्मियों पर भारी पड़ गई। दरअसल पुलिस ने डीसीएम को लूटने वालों की मुठभेड़ का समय रात एक बजे दिखाया, जबकि जिनके साथ वारदात का प्रयास हुआ। उन चालकों से मुठभेड़ के संदर्भ में चश्मदीद गवाही अगले दिन सुबह 11 बजे की दिखाई। यही 10 घंटों का अंतर पुलिस की छीछालेदर का कारण तब बना।

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जब 164 के बयान में डीसीएम चालक उमाशंकर और क्लीनर बृजेंद्र सिंह ने पूरे मामले की हकीकत बयां कर दी। दोनों ने बताया कि पुलिस ने उन दोनों से जबरन कागज में हस्ताक्षर कराए थे। जानकारों के मुताबिक मुठभेड़ और गवाही के समय में एक-दो घंटे का अंतर तो चल जाता है, लेकिन 10 घंटों का फर्क काफी होता है। बस यहीं से शुरू हुई सीबीसीआईडी की जांच 16 अक्तूबर को प्राथमिकी में तब्दील हो गई।

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12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि प्राथमिकी भले ही महाराजपुर थाने में दर्ज हुई हो, लेकिन इसकी विवेचना सीबीसीआईडी ही करेगी। ऐसा उनकी ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में ही स्पष्ट है। इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते हैं। बता दें कि सीबीसीआईडी की ओर से 35 साल पहले महाराजपुर थाने के तत्तकालीन 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ फर्जी मुठभेड़ दिखाकर 12 निर्दोष लोगों को फंसाने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

अवैध असलहे व विस्फोटक पदार्थ की दिखाई थी बरामदगी
प्राथमिकी पर पुलिस सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने 22 अगस्त 1991 की रात जीटी रोड (कानपुर-प्रयागराज हाईवे) पर वाहनों से लूटपाट कर रहे बदमाशों के साथ मुठभेड़ का दावा किया था। इसमें गांधीग्राम निवासी राकेश पाठक व उनके 11 साथियों की गिरफ्तारी कर उनके पास से अवैध असलहे व विस्फोटक पदार्थ की बरामदगी दिखाई थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्या सागर त्रिपाठी की तहरीर पर लूट, हत्या के प्रयास, शस्त्र व विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं में दो प्राथमिकी दर्ज कर सभी को जेल भेजा गया था।

चार्जशीट के बाद पेंशन से भी हाथ धोएंगे आरोपी
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 12 आरोपी पुलिसकर्मियों में 10 सेवानिवृत्त होकर पेंशन पा रहे हैं जबकि बाकी के दोनों पुलिसकर्मियों की स्थिति का पता किया जा रहा है। सीबीसीआईडी की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही आरोपियों की पेंशन रोकी जा सकेगी।
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घर से असलहे तो बम कहां से लाई थी पुलिस
पुलिस सूत्राें के अनुसार मामले के मुख्य पीड़ित राकेश के बड़े भाई देव प्रसाद पाठक ने बताया कि मुठभेड़ को ही साबित करने के लिए पुलिस उनके घर से से पिता के नाम की लाइसेंसी डबल बैरल बंदूक व राइफल जबरन ले गई थी। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस आखिर वह बम कहां से लाई थी जिसकी वजह से तीन लोगों को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा था।
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