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Kanpur: न खिड़की, न उजाला.. 10 फीट के 'पिंजरे' में अनाथ बच्चों की जिंदगी; 8 दिन बाद पहुंचीं सरकार की संवेदनाएं

Fri, 22 May 2026 09:40 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News:महाराजपुर क्षेत्र स्थित पुरवामीर गांव में रहने वाले चार अनाथ बच्चों की सुध आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक सतीश महाना ने भी ली। बच्चों की हालत सामने आने के आठ दिन बाद विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर उनका प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा और बच्चों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया।
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पीड़ित बच्चों से बात करता प्रतिनिधि मंडल - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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महाराजपुर के पुरवामीर गांव में मानवता को झकझोर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। माता-पिता को खो चुके मासूम बच्चों की सुध लेने के लिए आखिर आठ दिन बाद स्थानीय विधायक और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का प्रतिनिधि मंडल पहुंचा। प्रतिनिधि मंडल जब उन बच्चों के कमरे में दाखिल हुआ, तो वहां की बदहाली देखकर हर कोई सन्न रह गया। भीषण गर्मी और घुटन के बीच बच्चे जिस हाल में रह रहे हैं, उसे देखकर भाजपा नेताओं ने भी माना कि यह स्थिति बेहद भयावह है।

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भीषण गर्मी और 10x10 का कमरा: जहां सांस लेना भी दूभर

पुरवामीर गांव के ये अनाथ बच्चे फिलहाल एक 10 बाई 10 के छोटे से कमरे में रहने को मजबूर हैं। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के निर्देश पर प्रतिनिधि सुरेंद्र अवस्थी और विनय मिश्रा करीब एक दर्जन कार्यकर्ताओं के साथ जब गांव पहुंचे, तो वे बच्चों का हाल देख भावुक हो गए। प्रतिनिधि मंडल के सदस्य जैसे ही कमरे के अंदर दाखिल हुए, वहां की तपिश और उमस ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। भाजपा नेता विनय मिश्रा ने मौके पर कहा,इस कमरे में न तो कोई खिड़की है और न ही वेंटिलेशन का कोई जरिया। इतनी भीषण गर्मी में यहां बच्चों का दम घुट सकता है। यह दयनीय स्थिति है। आलम यह था कि एसी गाड़ियों में चलने वाला प्रतिनिधि मंडल उस कमरे में महज दो मिनट भी खड़ा नहीं रह सका और एक-एक करके सब बाहर निकल आए।

बच्चों को घर के लिए होती नाप - फोटो : amar ujala

40 हजार की मदद और अंत्योदय का सहारा

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की ओर से बच्चों को तत्काल राहत के रूप में 40,000 रुपये की नकद सहायता प्रदान की गई है। प्रतिनिधि सुरेंद्र अवस्थी ने बताया कि सरकारी कार्यों की व्यस्तता के कारण आने में देरी हुई, लेकिन सरकार इन बच्चों के साथ खड़ी है। प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। मौके पर पहुंचे एसडीएम नरवल विवेक कुमार मिश्रा ने जानकारी दी कि बच्चों का अंत्योदय राशन कार्ड बन चुका है और शनिवार को इसे उन्हें सौंप दिया जाएगा। इसी महीने से उन्हें मुफ्त राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

प्रशासनिक फाइलों में अटका बच्चों का 'भविष्य'

एक तरफ जहां सरकारी प्रतिनिधि मदद का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समाज सेवा के हाथ प्रशासनिक अनुमति के फेर में फंसे नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल ने बच्चों के लिए नया घर बनाने का बीड़ा उठाया था, लेकिन मामला कागजी कार्रवाई में उलझ गया है।

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व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष महेश वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, मानसून आने वाला है। बच्चे एक छोटे से असुरक्षित कमरे में रह रहे हैं। हमने जनसहयोग से निर्माण सामग्री जुटा ली, ठेकेदार तय कर दिया, लेकिन प्रशासन से निर्माण की स्पष्ट अनुमति नहीं मिल रही है। व्यापार मंडल के महामंत्री रजत पांडेय ने भावुक अपील करते हुए कहा कि बच्चों ने हमें मामा कहकर पुकारा है, इसलिए हम उनके सिर पर छत बनवाकर ही दम लेंगे। अब गेंद जिलाधिकारी के पाले में है कि वह इस नेक काम की अनुमति कब देते हैं।
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