महाराजपुर के पुरवामीर गांव में मानवता को झकझोर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। माता-पिता को खो चुके मासूम बच्चों की सुध लेने के लिए आखिर आठ दिन बाद स्थानीय विधायक और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का प्रतिनिधि मंडल पहुंचा। प्रतिनिधि मंडल जब उन बच्चों के कमरे में दाखिल हुआ, तो वहां की बदहाली देखकर हर कोई सन्न रह गया। भीषण गर्मी और घुटन के बीच बच्चे जिस हाल में रह रहे हैं, उसे देखकर भाजपा नेताओं ने भी माना कि यह स्थिति बेहद भयावह है।
भीषण गर्मी और 10x10 का कमरा: जहां सांस लेना भी दूभर
पुरवामीर गांव के ये अनाथ बच्चे फिलहाल एक 10 बाई 10 के छोटे से कमरे में रहने को मजबूर हैं। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के निर्देश पर प्रतिनिधि सुरेंद्र अवस्थी और विनय मिश्रा करीब एक दर्जन कार्यकर्ताओं के साथ जब गांव पहुंचे, तो वे बच्चों का हाल देख भावुक हो गए। प्रतिनिधि मंडल के सदस्य जैसे ही कमरे के अंदर दाखिल हुए, वहां की तपिश और उमस ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। भाजपा नेता विनय मिश्रा ने मौके पर कहा,इस कमरे में न तो कोई खिड़की है और न ही वेंटिलेशन का कोई जरिया। इतनी भीषण गर्मी में यहां बच्चों का दम घुट सकता है। यह दयनीय स्थिति है। आलम यह था कि एसी गाड़ियों में चलने वाला प्रतिनिधि मंडल उस कमरे में महज दो मिनट भी खड़ा नहीं रह सका और एक-एक करके सब बाहर निकल आए।
40 हजार की मदद और अंत्योदय का सहारा
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की ओर से बच्चों को तत्काल राहत के रूप में 40,000 रुपये की नकद सहायता प्रदान की गई है। प्रतिनिधि सुरेंद्र अवस्थी ने बताया कि सरकारी कार्यों की व्यस्तता के कारण आने में देरी हुई, लेकिन सरकार इन बच्चों के साथ खड़ी है। प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। मौके पर पहुंचे एसडीएम नरवल विवेक कुमार मिश्रा ने जानकारी दी कि बच्चों का अंत्योदय राशन कार्ड बन चुका है और शनिवार को इसे उन्हें सौंप दिया जाएगा। इसी महीने से उन्हें मुफ्त राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
प्रशासनिक फाइलों में अटका बच्चों का 'भविष्य'
एक तरफ जहां सरकारी प्रतिनिधि मदद का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समाज सेवा के हाथ प्रशासनिक अनुमति के फेर में फंसे नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल ने बच्चों के लिए नया घर बनाने का बीड़ा उठाया था, लेकिन मामला कागजी कार्रवाई में उलझ गया है।