कानपुर में परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय के पुनर्निर्माण को लेकर छिड़ा सियासी संग्राम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आर्यनगर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ बाजपेई और जिला प्रशासन के बीच ठन गई है। प्रशासन ने शुक्रवार सुबह विधायक को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया, जिसके विरोध में विधायक ने एक ऐसा संकल्प लिया है जिसने शहर के सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है।
भारी पुलिस बल की तैनाती, छावनी बना विधायक आवास
देर रात से ही अमिताभ बाजपेई के आवास के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी तैनात कर दी गई थी। सुबह होते ही जब समर्थकों ने विधायक के घर जुटना शुरू किया, तो पुलिस ने सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, विधायक ने इसे लोकतंत्र की हत्या और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया है।
विधायक का संकल्प- त्याग से दिलाएंगे स्कूल का हक
नजरबंदी के बीच अमिताभ बाजपेई ने मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा संकल्प लिया। उन्होंने घोषणा की कि जब तक परमट का प्राथमिक विद्यालय बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक वह:
पैरों में चप्पल या जूता नहीं पहनेंगे।
शरीर पर केवल साधारण वस्त्र धारण करेंगे।
किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम या पार्टी की औपचारिक मीटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे।
विधायक ने भावुक होते हुए कहा, यह बच्चों के भविष्य का सवाल है। अगर सरकार और प्रशासन जनहित के काम को रोकने के लिए पुलिस का सहारा ले रहे हैं, तो मैं भी सत्याग्रह के मार्ग पर चलूंगा। जब तक स्कूल की ईंट-ईंट नहीं लग जाती, मैं सुख-सुविधाओं का त्याग करता हूं।
प्रशासन को चुनौती: 'अपनी सुरक्षा में ही ले चलें'
विधायक ने स्पष्ट किया कि वह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्कूल के लिए भूमि पूजन करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने पुलिस प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर पुलिस को लगता है कि मेरे बाहर निकलने से खतरा है, तो वह अपनी सुरक्षा में ही मुझे कार्यक्रम स्थल तक ले चलें। मैं शांतिपूर्वक पूजन करना चाहता हूं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि यदि उन्हें घर से नहीं निकलने दिया गया, तो वह अपने आवास पर ही मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन करेंगे और वर्चुअल शिलान्यास कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय काफी समय से जर्जर स्थिति में था, जिसे ढहा दिया गया था। स्थानीय निवासियों और विधायक का आरोप है कि इस बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की नजर है और प्रशासन स्कूल बनाने में जानबूझकर देरी कर रहा है। सपा विधायक लगातार मांग कर रहे हैं कि यहां जल्द से जल्द सरकारी स्कूल का भवन बने ताकि गरीब बच्चों की शिक्षा बाधित न हो।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
विधायक की नजरबंदी की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि को जनता के काम के लिए भूमि पूजन करने से रोकना तानाशाही है। वहीं, बीजेपी खेमे का मानना है कि विधायक बिना अनुमति के कार्यक्रम कर शहर की फिजा बिगाड़ना चाहते हैं।