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Exclusive: कानपुर दक्षिण में गांव से ज्यादा शहरी क्षेत्र, इसलिए नहीं बन सकती तहसील, एडीएम वित्त ने कही ये बात

Tue, 08 Apr 2025 12:38 PM IST
हिमांशु अवस्थी रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: सितंबर 2024 में इस प्रस्ताव को फाइनल कर जिला प्रशासन ने राजस्व परिषद को भेज दिया था। बीते माह जब शासन स्तर पर मंथन किया गया, तो प्रस्ताव तहसील के मानकों पर खरा नहीं उतर सका।
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कानपुर तहसील - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर दक्षिण में नई तहसील बनाने की कवायद राजस्व परिषद के मानकों पर खरी नहीं उतर सकी। इसी वजह से नई तहसील बनाने के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया है। किसी भी तहसील को बनाने के लिए कम से कम 200 राजस्व गांवों का होना अनिवार्य होता है, पर प्रस्ताव में 140 गांव शामिल किए गए थे। साथ ही दक्षिण क्षेत्र में गांव से ज्यादा शहरी क्षेत्र हैं, जो गांव हैं भी, वे नगर निगम परिक्षेत्र में आते हैं। इस वजह से प्रस्ताव खारिज हो गया।

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स्थानीय स्तर पर यह प्रस्ताव दो बार बनाया जा चुका है, लेकिन शासन को पहली बार आठ माह पहले इसे भेजा गया था। प्रस्ताव में तहसील सदर के 140 राजस्व गांवों और करीब छह लाख की आबादी को शामिल किया गया था। 44 लेखपालों की आवश्यकता भी दिखाई गई थी। प्रस्ताव पर शासन स्तर पर मंथन हुआ तो इसमें लेखपाल क्षेत्रफल (एक लेखपाल क्षेत्रफल के तहत तीन से चार राजस्व गांव आते हैं) काफी कम पाया गया। मानक के अनुसार एक तहसील के लिए 100 से 120 लेखपाल क्षेत्रफल का एरिया होना जरूरी है पर प्रस्ताव में 44 लेखपालों की जरूरत बताई गई।

प्रस्ताव तहसील के मानकों पर खरा नहीं उतरा
प्रस्ताव में सदर तहसील के कुल 256 राजस्व गांवों में 140 गांव बिधनू ब्लॉक, नौबस्ता, चकेरी, रूमा क्षेत्र में हैं। 19 संग्रह अमीन भी शामिल किए गए थे। 23967 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि भी दिखाई थी। सितंबर 2024 में इस प्रस्ताव को फाइनल कर जिला प्रशासन ने राजस्व परिषद को भेज दिया था। बीते माह जब शासन स्तर पर मंथन किया गया, तो प्रस्ताव तहसील के मानकों पर खरा नहीं उतर सका। प्रस्ताव खारिज होने का अहम कारण लेखपाल क्षेत्रफल की संख्या भी कम होना बताया गया है। प्रस्ताव खारिज होने के बाद नई तहसील बनाने की कवायद भी प्रशासन स्तर पर ठंडे बस्ते में चली गई है।

डीएम स्तर पर ही खारिज हो गया था पहला प्रस्ताव
सदर तहसील में बढ़ रहे काम के बोझ को कम करने के लिए वर्ष 2022 से कानपुर दक्षिण में प्रस्तावित नई तहसील बनने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा था। पहली बार जिला प्रशासन स्तर पर जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, उसमें घाटमपुर और बिल्हौर तहसील के करीब 100 से गांव शामिल किए गए थे। जब यह रिपोर्ट तत्कालीन डीएम राकेश कुमार सिंह के पास पहुंची तो उन्होंने इसे इस वजह से खारिज कर दिया क्योंकि इसमें दूसरे तहसीलों के गांवों को शामिल कर लिया गया था। डीएम का कहना था कि दूसरे तहसीलों के लोगों को अपने काम के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ेगी।

इसलिए पड़ी थी तहसील की जरूरत
सदर तहसील क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्रों के 256 से ज्यादा गांव आते हैं। यहां की आबादी करीब 40 लाख है। गांवों के तहसील और जमीन संबंधी काम सदर तहसील से ही होते हैं। क्षेत्र बड़ा होने के कारण शिकायतें हमेशा लंबित ही रहती हैं। प्रस्तावित नई तहसील में करीब 120 गांवों को शामिल करने से काम बंट जाता तो फरियादियों को सुविधा होती और समस्याओं का समय से निस्तारण हो सकता था।

महीने भर में बन रहे प्रमाण पत्र
सदर तहसील पर भार अधिकर होने के कारण खसरा खतौनी, दाखिल-खारिज, वरासत बनवाने, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाने में करीब एक माह का समय लग जाता है। जमीन खरीद-फरोख्त और कब्जे की शिकायतों के लिए बिधनू और दक्षिण के लोगों को एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

एक नजर अन्य तहसीलों पर

सदर तहसील
राजस्व गांव- 256
आबादी - 35 लाख
लेखपाल-59

घाटमपुर तहसील
राजस्व गांव- 239
आबादी- 9 लाख
लेखपाल-61
 
नर्वल तहसील
राजस्व गांव-207
आबादी- 7 लाख
लेखपाल - 55
 
बिल्हौर तहसील
राजस्व गांव-410
आबादी 8 लाख
लेखपाल- 82
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नई तहसील का प्रस्ताव इसलिए तैयार किया गया था, ताकि दक्षिण क्षेत्र के लोगों को चक्कर नहीं लगाने पड़े। इसमें सदर तहसील के करीब 140 गांवों को शामिल किया गया था। लेखपाल क्षेत्रफल मानकों के अनुरूप नहीं था, इस कारण प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है।  -राजेश कुमार, एडीएम वित्त
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