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UP: गोशाला के लिए दी गई जमीन पर दुकानें-गोदाम, सरकार लेगी वापस…ADM वित्त की कोर्ट ने पुराने आदेश को किया बहाल

Sun, 31 Aug 2025 12:09 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: भाैती गांव स्थित इस जमीन पर 1975 में बांग्लादेश आए हिंदू परिवारों को बसाया गया था। कुछ जमीन अभी भी वे लोग काबिज हैं , बकि बाकी जमीनों को सोसाइटी ने अपने अधिकार क्षेत्र में रख लिया था। बीच-बीच में बांग्लादेशी शरणार्थियों की ओर से आवाज उठाई जा रही थी कि उन्हें खेती के लिए सरकार ने जमीन दी थी।
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कानपुर गोशाला सोसाइटी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में गोशाला सोसाइटी से प्रदेश सरकार 164.684 हेक्टेयर जमीन वापस लेगी। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी ने सोसाइटी की अपील खारिज करते हुए एडीएम कोर्ट के 11 साल पुराने आदेश को बहाल रखा है। भौंती स्थित जमीन की वर्तमान बाजार कीमत अरबों रुपये में बताई जाती है। गोशाला सोसाइटी के पास निर्धारित कानूनी सीमा से अधिक जोत होने पर कुल 164.684 हेक्टेयर भूमि अतिरिक्त घोषित करके राज्य सरकार के पक्ष में अधिग्रहण करने का आदेश तत्कालीन एडीएम कोर्ट ने 19 सितंबर 2014 को दिया था।

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आदेश के खिलाफ सोसाइटी ने मंडलायुक्त की कोर्ट में अपील की जहां कई तथ्यों को नजरंदाज कर आदेश पारित किए जाने की बात कही गई थी। मंडलायुक्त की कोर्ट ने एडीएम कोर्ट को दोबारा सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। इस पर एडीएम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सोसाइटी पशुओं की संख्या, रखरखाव, संचालन आदि के बारे में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। सोसाइटी को चैरिटेबल ट्रस्ट बताने की कोशिश की गई जबकि तहसीलदार सदर, तहसील अकबरपुर व कालपी जालौन की रिपोर्ट में कहा गया कि सोसाइटी इस जमीन का औद्योगिक और वाणिज्यिक इस्तेमाल कर रही है।

कानपुर गोशाला सोसाइटी - फोटो : amar ujala
एडीएम कोर्ट ने पूर्व के आदेश को बहाल रखा
जमीन ग्राम जूहीकला, नगर निगम व केडीए के क्षेत्र में आती है। जांच में सामने आया था कि सोसाइटी ने यह जमीन कई लोगों को किराये पर दे रखी हैं जो औद्योगिक इस्तेमाल कर रहे हैं। जमीन पर कोई कृषि कार्य नहीं हो रहा। कुछ जमीन पर आबादी है कुछ पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे दुकानें बनी हैं। एक ऑक्सीजन सिलिंडर फिलिंग गोदाम व एक डिटर्जेंट पाउडर कंपनी का गोदाम भी है। दस्तावेजी साक्ष्यों व रिपोर्ट के आधार पर एडीएम कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश को बहाल रखा है।

कानपुर गोशाला सोसाइटी - फोटो : amar ujala
यह गोशाला की जमीन है। 1975 में सीलिंग के तहत प्रशासन ने जमीन अपने कब्जे में ले ली थी। बाद में गोशाला साेसाइटी ने मंडलायुक्त की कोर्ट में अपील की तो जिला प्रशासन से कहा गया कि वह अपने आदेश पर फिर से विचार करे। अब फिर से इस जमीन को वापस लिए जाने का आदेश जारी किया गया है। इसके विरोध में सोसाइटी मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेगी। इस मामले को हाईकोर्ट में लेकर जाएंगे।  -सुरेश गुप्ता, उपाध्यक्ष, गोशाला सोसाइटी
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कानपुर गोशाला सोसाइटी - फोटो : amar ujala
बांग्लादेश से आए लोगों को बसाया गया था इस जमीन पर
भाैती गांव स्थित इस जमीन पर 1975 में बांग्लादेश आए हिंदू परिवारों को बसाया गया था। कुछ जमीन अभी भी वे लोग काबिज हैं , बकि बाकी जमीनों को सोसाइटी ने अपने अधिकार क्षेत्र में रख लिया था। बीच-बीच में बांग्लादेशी शरणार्थियों की ओर से आवाज उठाई जा रही थी कि उन्हें खेती के लिए सरकार ने जमीन दी थी। जमीन कागजों में तो मिली लेकिन उस पर उन लोगों को कब्जा नहीं दिया गया। एक सप्ताह पहले विधायक अभिजीत सिंह सांगा इन शरणार्थियों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ गए थे। कहा जा रहा है कि उसके बाद ही यह फैसला आया है।
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