संपत्तियों पर स्थानीय लोगों ने कर लिया कब्जा
इनमें फ्लैट, आवासीय भवन, दुकानें और जमीनें शामिल हैं। प्रमुख इलाकों में होने से कई संपत्तियों का बाजार मूल्य करोड़ों रुपये है। शत्रु संपत्तियों पर कब्जे को लेकर प्रशासन को वर्षों से शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की संपत्तियों पर स्थानीय लोगों ने कब्जा कर लिया।
28 मामलों की रिपोर्ट उप जिलाधिकारी स्तर पर लंबित
शासन के निर्देश पर जांच शुरू हुई। शुरुआती स्तर पर करीब 89 संपत्तियां चिह्नित की गईं। अभिलेखों के सत्यापन के बाद करीब 35 संपत्तियां शत्रु संपत्ति की श्रेणी में मिलीं। सर्वे, सत्यापन और मूल्यांकन के बाद अब तक सात शत्रु संपत्ति ही घोषित हुई हैं। 28 मामलों की रिपोर्ट उप जिलाधिकारी स्तर पर लंबित है।
कब्जा हटाना बड़ी चुनौती
सात घोषित संपत्तियों में चार से पांच पर प्रशासन ने ताला लगा दिया है। वहीं शत्रु संपत्ति की श्रेणी में मिले कुछ फ्लैटों में लोग अभी काबिज हैं। इसके अलावा कई ऐसी ही संपत्तियों पर लंबे समय से दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलने के कारण कब्जा हटाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
जिले में अभी सात संपत्तियां शत्रु संपत्ति घोषित हुई हैं। अन्य संपत्तियों की जांच जल्द पूरी कराई जाएगी। शासन के निर्देश के अनुसार समय पर कार्रवाई होगी। -आलोक कुमार गुप्ता, अपर जिलाधिकारी नगर