15 अप्रैल को निष्क्रिय कर दिया गया खाता
पत्र में बताया गया कि बैंक में उप प्रबंधक स्तर के अधिकारी व एसबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी ने अन्य अफसरों और कर्मियों के साथ मिलकर फर्जी ई-केवाईसी करके इस निष्क्रिय खाते को 25 मार्च 2025 को सक्रिय करवाकर घोटाले को अंजाम दिया। मामले में चर्चा शुरू हुई तो 11 अप्रैल को खाते में रुपये जमा करा दिए गए और इसे फिर से 15 अप्रैल को निष्क्रिय कर दिया गया।
उच्च प्रबंधन ने अब तक दर्ज नहीं कराई है एफआईआर
बताया गया कि अब पूरे मामले की जानकारी लखनऊ और कानपुर के अधिकारी मिलकर करेंगे। शुरुआती आंतरिक जांच में फर्जी आधारकार्ड, पता से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मिली है। इसका सत्यापन कराया जा रहा है। अब तक उच्च प्रबंधन की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं कराने से उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
10 साल पहले लाटूश रोड शाखा में भी आया था इस तरह का मामला
सूत्रों ने बताया कि 10 साल पहले एसबीआई की लाटूश रोड शाखा में भी इसी तरह मृतक के निष्क्रिय खाते से 20 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इसके बाद प्रबंधन ने कई अफसरों पर कार्रवाई की थी। एक अधिकारी को नौकरी से हटा दिया गया था और कई के तबादले कर दिए गए थे।