लगता है- कोर्ट को जेसीपी के आदेश की सूचना दी गई
इस पर कोर्ट की अनुमति मिली थी, लेकिन जो प्रार्थनापत्र हाईकोर्ट में पेश किया गया उसमें लिखा था कि नरेंद्र देव के प्रार्थना पत्र के आधार पर जेसीपी क्राइम ने अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं। केस डायरी कोर्ट में दाखिल है इसे देखने की अनुमति दी जाए। हाईकोर्ट ने पत्र को देखने के बाद कहा कि इसकी भाषा से लगता है कि कोर्ट से अनुमति नहीं मांगी गई, बल्कि कोर्ट को जेसीपी के आदेश की सूचना दी गई।
जांच अमान्य होगी और रिकॉर्ड से हटा दी जाएगी
यह अहंकारपूर्ण ढंग से लिखा गया आवेदन है। जेसीपी का आदेश क्षेत्राधिकारहीन और निरस्त करने योग्य है। जेसीपी या किसी भी रैंक के पुलिस अधिकारी को अगर अग्रिम विवेचना करनी है तो ट्रायल कोर्ट को आवेदन देना होगा। कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद ही अग्रिम विवेचना की जा सकती है। जेसीपी के आदेश से की गई अब तक की कोई भी जांच अमान्य होगी और रिकॉर्ड से हटा दी जाएगी।
अग्रिम विवेचना में फंसी रेखा वर्मा को पुलिस ने भेजा था जेल
अधिवक्ता राजाराम की उनके ही घर के बाहर 22 दिसंबर 2021 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने दिलन्याज, रामखिलावन, रोहित यादव और अंकित यादव के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजकर 22 मार्च 2022 को विवेचना समाप्त करने की बात कही थी। कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई भी शुरू हो गई थी।
मुकदमे में अग्रिम विवेचना के आदेश दे दिए
इस बीच राजाराम के बेटे नरेंद्र देव ने पिता का जमीन को लेकर एनआरआई सिटी के मालिकों व समधी राजबहादुर से विवाद चलने की बात कहते हुए पिता की हत्या के षड्यंत्र में कुछ और लोगों के शामिल होने का संदेह जताया। तत्कालीन जेसीपी क्राइम ने पांच दिसंबर 2025 को मुकदमे में अग्रिम विवेचना के आदेश दे दिए।
हाईकोर्ट में दाखिल की गई थीं याचिकाएं
विवेचना मूलगंज इंस्पेक्टर को सौंपी गई। पुलिस ने राजाराम की बहू रेखा वर्मा को मुंबई से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। शेष पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। इस पर रेखा वर्मा, राजबहादुर और राकेश कुमार तिवारी की ओर से जेसीपी के आदेश को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं।