अधिकारियों के आने से पहले जली 'लकड़ियों की आग
जिलाधिकारी के आदेश पर जब रविवार को महिला एवं बाल कल्याण मिशन और चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम गांव पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 14 साल का बड़ा भाई सुबह 5 बजे उठकर लकड़ियां बीन चुका था और अपनी छोटी बहन व भाइयों के लिए चूल्हे पर खाना बना चुका था। सरकारी फाइलों में योजनाओं का अंबार है, लेकिन इन बच्चों के घर में न गैस सिलेंडर है और न चूल्हा।
एक चादर और टूटी खाट: यही है अनाथों की गृहस्थी
प्रशासनिक अमला जब सांत्वना देने पहुंचा, तो घर के हालात देखकर कलेजा मुंह को आ गया। गृहस्थी के नाम पर दो-चार पुराने बर्तन, एक टूटी हुई खाट और बिस्तर के नाम पर महज एक चादर। इसी एक चादर में चारों भाई-बहन सिमटकर रात काटते हैं। दो दिनों तक ये बच्चे भूख और अभाव से लड़ते रहे, तब जाकर अफसरों को इनकी सुध आई।
बच्चों से जानकारी जुटाते अफसर
- फोटो : amar ujala
भैया नहीं मारते, बाकी सब मारते हैं
जब चाइल्ड हेल्प लाइन के कर्मचारियों ने छोटे बच्चों से पूछा कि सबसे ज्यादा प्यार कौन करता है? तो मासूमों की आंखों में आंसू छलक आए। उन्होंने बिलखते हुए कहा, "भैया के अलावा हमारा कोई नहीं है, सब मारते हैं, सिर्फ भैया नहीं मारते।" 14 साल का वह किशोर अब अपने भाई-बहनों के लिए बाप की जिम्मेदारी और मां का प्यार, दोनों निभाने की कोशिश कर रहा है।
घटना का फ्लैशबैक: जब 112 पर गूंजी थी मासूम की पुकार
यह पूरा मामला दो दिन पहले तब शुरू हुआ था, जब बड़े भाई ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को बताया था कि उसकी चाची उसकी छोटी बहन को हीटर से जला रही है। पुलिस मौके पर पहुंची, बच्चों को क्रूर चाचा-चाची से मुक्त कराया गया, लेकिन उसके बाद दो दिनों तक ये बच्चे प्रशासनिक मदद के लिए तरसते रहे।
अब कागजी कार्रवाई का दौर शुरू
रविवार को पहुंची टीम ने बच्चों का डेटा एकत्रित किया और उनके दस्तावेज सुरक्षित किए। अधिकारियों का दावा है कि बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा और समय-समय पर निगरानी की जाएगी। चाइल्ड हेल्प लाइन के कर्मियों ने फल बांटकर बच्चों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश जरूर की, लेकिन सवाल वही है कि राशन के पैकेट के अलावा उन मूलभूत सुविधाओं का क्या, जिनके अभाव में ये बच्चे असुरक्षित हैं