सीएमओ को जांच का निर्देश मिला
अप्रैल 2026 में 50 बेड और एनएबीएच होने पर ही अस्पतालों को आयुष्मान योजना का लाभ दिए जाने का निर्देश आया। डॉ. महेंद्र के अनुसार, तीन बार आवेदन करने पर भी उन्हें योजना का लाभ देने के बजाय उसे निरस्त कर दिया गया। मामले को लेकर हाईकोर्ट में गुहार लगाई, तो सीएमओ को जांच का निर्देश मिला। सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. आरपी मिश्रा की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है जिसमें डॉ. कैलाश और डॉ. प्रणव भी शामिल हैं।
एक लाख रुपये घूस मांगने का लगाया आरोप
डॉ. महेंद्र वर्मा ने बताया कि उनका 50 बेड का अस्पताल है। पिछले साल अगस्त से लेकर इस अगस्त तक तीन बार आयुष्मान योजना के लिए उन्होंने आवेदन किया। जिला प्रोग्राम अधिकारी डॉ. सुधाकर शुक्ला एक बार भी अस्पताल में नहीं आए और आवेदन निरस्त कर दिए। आवेदन निरस्त होने पर वह कोर्ट चले गए। डॉ. वर्मा ने आरोप लगाया कि उनसे एक लाख रुपये की मांग की गई। पैसे की मांग पूरी न कर पाने के कारण उनके अस्पताल को योजना का लाभ अब तक नहीं मिला।
वर्ष 2023 में भी अनियमितता की शिकायत शासन में की गई थी। उस समय भी डॉ. आरपी मिश्रा, डॉ. सुबोध प्रकाश और डॉ. आरएन सिंह की जांच कमेटी बनाई गई थी। मामले में डॉ. सुधाकर दोषी भी पाए गए थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। उसके बाद भी कई बार इनकी शिकायतें आईं तो उनकी जगह पर डॉ. अश्विनी गौतम को जिम्मेदारी सौपने के निर्देश दिए गए। हालांकि इसके बावजूद वे अपने पद पर अभी तक बने हैं। मामले में शिकायत आई तो जांच कमेटी बनाई गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। -डॉ. हरिदत्त नेमी, सीएमओ