फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: 15 से 35% तक बढ़ सकती हैं पान मसाला-तंबाकू की कीमतें, कारोबार पर बढ़ेगी निगरानी…लापरवाही पर जुर्माना

Sun, 04 Jan 2026 09:17 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर में एक फरवरी से पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर 40% जीएसटी और क्षमता आधारित उपकर लगेगा। इससे गुटखा-तंबाकू 15-35% तक महंगे हो सकते हैं और मशीनों की निगरानी के लिए सख्त नियम लागू होंगे।
विज्ञापन
पान मसाला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर में  एक फरवरी से पान मसाला, तंबाकू व सिगरेट उत्पादों पर 40 फीसदी जीएसटी के अलावा स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। उत्पादन के आधार पर ही उपकर लगेगा। इससे पान मसाला, तंबाकू की कीमतें 15 से 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। बिक्री में कमी और अवैध व्यापार बढ़ने का भी खतरा है। शहर में पान मसाला की 12 इकाइयां हैं। इस व्यवस्था को पूर्व में लागू रही कंपाउंडिंग व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। इसमें प्रति मशीन सरकार 18 लाख रुपये शुल्क लेती थी। जानकारों का कहना है कि कर बोझ अंतिम रूप से ग्राहकों पर पड़ेगा। कर बढ़ाया गया है।

विज्ञापन

ऐसे में कर चोरी बढ़ने से इन्कार भी नहीं किया जा सकता है। फैक्टरी संचालक को यह भी बताना होगा कि पान मसाला फैक्टरी में कितनी मशीनें हैं। मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि सरकार का मानना है कि इन वस्तुओं के निर्माता एवं ट्रेडिंग करने वाले व्यापारी न तो अपने सही व पूरे उत्पादन के आंकड़ों को घोषित करते हैं और न ही सरकार को सही राजस्व की अदायगी करते हैं। उन्होंने बताया कि इस कारण पान मसाला निर्माता कारोबारियों पर स्वास्थ्य व राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लागू किया जा रहा है। यह पुराने उपकर का स्थान लेगा।

90 दिन के भीतर मशीनों का भौतिक सत्यापन करेंगे
पुराना क्षतिपूर्ति उपकर एक फरवरी 2026 से सभी वस्तुओं पर समाप्त हो जाएगा। हर फैक्टरी काे अलग-अलग पंजीकरण कराना होगा। सात दिन के भीतर मशीनों की अधिकतम रेटेड स्पीड आदि भी स्पष्ट करनी होगी। इसी के आधार पर उपकर की गणना हो सकेगी। जीएसटी एवं एक्साइज विभाग के अधिकारी इस घोषणा के 90 दिन के भीतर मशीनों का भौतिक सत्यापन करेंगे। यह उपकर प्रत्येक महीने की शुरुआत में उस महीने की सात तारीख से पहले जमा करना होगा। यदि समय से नहीं जमा कराया जाएगा, तो दस हजार का अर्थदंड लगाया जाएगा। पान मसाला के उत्पादन की क्षमता के आधार पर इस उपकर का भुगतान किया जाएगा। यह जीएसटी एवं एक्साइज के अलावा अलग से भुगतान करना होगा।

उत्पादन क्षमता के आधार पर सेस लगेगा
उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था पूर्व में लागू रही कंपाउंडिंग की तर्ज पर की जा रही है ताकि पानम साला इकाइयों की निगरानी की जा सके। कानपुर सीए सीपीई स्टडी सर्किल के डिप्टी कन्वीनर सीए नितिन सिंह और कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री सीए राजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि इस नई कर प्रणाली में तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगेगा, जबकि पान मसाला पर उत्पादन क्षमता के आधार पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सेस लगेगा। चबाने वाली तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा के निर्माताओं के लिए क्षमता आधारित शुल्क व्यवस्था लागू होगी।

बदलाव से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा
जीएसटी दरों में भी बदलाव किया गया है। तंबाकू और पान मसाला उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। बीड़ी पर 18 प्रतिशत की दर ही जारी रहेगी। ये नए कर उत्पाद शुल्क और जीएसटी सेस के अतिरिक्त होंगे।शहर में 3000 करोड़ से ज्यादा का घोषित-अघोषित कारोबार जीएसटी आने के बाद छोटे कारोबारियों ने चोरी-छिपे काम शुरू किया। शहर में अब फिर से उत्पादन बढ़ गया है। शहर में करीब तीन हजार करोड़ से ज्यादा का घोषित-अघोषित सालाना कारोबार है। द किराना मर्चेंट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अलंकार ओमर ने बताया कि इस बदलाव से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा। पान मसाला, तंबाकू की कीमतें 15 से 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।

इसलिए पान-मसाला कारोबार पर बढ़ रही निगरानी
जीएसटी आने से पहले हर मशीन पर सरकार ने 18 लाख रुपये कंपाउंडिंग फिक्स करते हुए टैक्स लगाया था। इसके चलते छोटे कारोबारी बाजार से बाहर हो गए। बड़े कारोबारी काम करते रहे। 2017 में जीएसटी आने के बाद इसे संवेदनशील उद्योग में शामिल कर लिया गया। इसके बाद छोटे कारोबारियों ने चोरी-छिपे काम शुरू कर दिया। इसमें कर चोरी भी की जा रही है। इसकी वजह से निगरानी बढ़ाई जा रही है।
विज्ञापन

एक मशीन पांच घंटे में तैयार करती 15 हजार पाउच
मशीनों पर सरकार इसलिए निगरानी बढ़ा रही है ताकि कर चोरी खत्म की जा सकी। एक मशीन यदि पांच घंटे तक लगातार चलती है तो 15 हजार पाउच तैयार होते हैं। इससे जुड़े कारोबारी कई शिफ्टों में माल तैयार करते हैं या फिर ऑर्डर के अनुरूप लगातार मशीनें चलवाते हैं लेकिन कारोबारी आंकड़ों में हमेशा कम मशीन चलना दिखाता है। इसके चलते तैयार और कच्चा माल, पैक माल में भी कर चोरी की जाती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें