प्राइवेट प्रैक्टिस के मामले में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी पैथोलॉजिस्ट डॉ. स्वप्निल गुप्ता की बर्खास्तगी के बाद पांच और चिकित्सा शिक्षक रडार पर हैं। इनके खिलाफ भी गोपनीय रिपोर्ट शासन को दी गई है। इसके अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस के साथ हैलट में रोगियों से बाहर से दवाएं मंगाने के मामले में दो डॉक्टरों पर भी गाज गिर सकती है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने मंगलवार को बताया कि राघवेंद्र गुप्ता और डॉ. स्वप्निल गुप्ता के खिलाफ बर्खास्तगी का मामला प्रदेश का पहला है। लोक सेवा आयोग से चयनित डॉक्टर को बर्खास्त किया गया है। इसके पहले आयोग से चयनित किसी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा शिक्षक के खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस में बर्खास्तगी की कार्रवाई नहीं हुई है। डॉ. गुप्ता के खिलाफ न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने दो बार रिपोर्ट दी थी। इसके बाद शासन ने कमेटी गठित कर जांच कराई। इसमें डीएम, सीएमओ समेत चार सदस्य होते हैं। कमेटी ने प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप सही पाए।
इसके अलावा रोगियों ने खुद उनसे आकर शिकायत की कि डॉ. गुप्ता अपने अस्पताल बुलाते हैं। रोगियों का कहना था कि वह कहते हैं कि हैलट में कुछ नहीं है। कई बार समझाने और चेतावनी देने के बाद भी डॉ. गुप्ता ने बात नहीं मानी। उन्होंने बताया कि प्राइवेट प्रैक्टिस और रोगियों से बाहर से दवा मंगाने के मामले में दो डॉक्टरों के खिलाफ जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। डॉ. काला ने कहा कि ऐसी कार्रवाई से सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगाम लगेगी। इससे रोगियों को राहत मिलेगी।