जाजमऊ के चमड़ा कारोबारी मो. अहमद लारी के साथ छह अक्तूबर को हुई 2.66 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा पुलिस ने शुक्रवार को किया। सीपी रघुबीर लाल ने बताया कि मामले में चकेरी निवासी अखिल सिंह चौहान और सतेंद्र यादव उर्फ टोनी को गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी अखिल ने न सिर्फ लारी से निवेश के नाम पर रकम वसूली बल्कि फर्म दिखाकर चकेरी की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से बड़ी कंपनियों को दी जाने वाली सीआईबी (कॉरपोरेट इंटरनेट बैंकिंग) सुविधा भी ले रखी थी।
इस सुविधा के माध्यम से ठगी की रकम को एक साथ 89 खातों में ट्रांसफर किया गया। आरोपी के बैंक खाते में पुलिस को सिर्फ 25 लाख रुपये ही मिले। अखिल बीसीए किए हुए है और उसने कई फर्जी फर्म बना रखी हैं। मुंबई में बैठे कैली व विवेक रॉय के साथ मिलकर अखिल एपीके फाइल, डिजिटल अरेस्ट व निवेश के नाम पर लोगों से साइबर ठगी कर रहा था। पुलिस कैली का पता लगा रही है।
वादी लारी ने पुलिस को बताया था कि फिनसोल प्राइवेट लिमिटेड फर्म में निवेश करने पर उन्हें बड़े मुनाफे का लालच दिया गया। उन्होंने 2.66 करोड़ निवेश किए थे। मुनाफा मिलना तो दूर पूरी रकम डूबने की बात पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अखिल और टोनी शातिर हैं। उन्होंने हैवी मोटर ड्राइविंग स्कूल व सद्भावना सॉल्यूशन प्रा. लि. आदि फर्जी फर्में खोल रखी हैं। इनके माध्यम से लोगों को निवेश में लाभ का झांसा देकर साइबर ठगी का शिकार बनाते थे।
अखिल ने चकेरी की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से सीआईबी सुविधा ले रखी थी। इसी के माध्यम से तीन और पांच अगस्त को 3.24 करो़ड़ रुपये का ट्रांजेक्शन भी किया। अखिल और टोनी ने चकेरी की एक और बैंक जैना से भी सीआईबी सुविधा लेने का प्रयास किया। इसके लिए मस्टर्ड ऑयल पतंजलि नाम की फर्जी फर्म के नाम डेढ़ करोड़ का ऑर्डर दिखाने का प्रयास किया लेकिन बैंक मैनेजर की सख्ती के चलते उसके मंसूबे पूरे न हो सके। इसके बाद अखिल ने मैनेजर को भी काफी परेशान किया था।
31 खातों के खिलाफ पोर्टल पर 38 शिकायतें दर्ज
सीपी ने बताया कि जांच में अखिल के कुल 31 बैंक खाते सामने आए हैं। इनके खिलाफ उड़ीसा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा व उत्तराखंड आदि राज्यों से करीब 38 शिकायतें और सात एफआईआर दर्ज हैं। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि साइबर ठगी की रकम को लेकर अखिल का अपने ही साथियों से लेनदेन का विवाद भी हुआ था। इसकी शिकायत एक बार अखिल ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की थी।
पुलिस बोली... रकम न सही कड़ी तो टूटी
हर बार की तरह इस बार भी साइबर ठगी के खुलासे में आंकड़ों में लाखों-करोड़ों की रकम तो सामने आई लेकिन न तो पकड़े गए आरोपियों की हैसियत ही लाखों-करोड़ों की निकली और न ही कोई मास्टर माइंड सामने आया। इस पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ठगी की रकम मिलना या मास्टर माइंड का पकड़ा जाना इतना जरूरी नहीं है जितना ठगी की कड़ी टूटना आवश्यक है। रही बात मास्टर माइंड की तो हर बार की तरह पुलिस से टीमें लगी हैं का ही जवाब मिला।