ये है ग्रामीणों की व्यथा
तिलशहरी के ग्रामीण बताते है कि स्वच्छ भारत का सपना हमारे लिए सपना ही रह गया है। महिला सुशीला ने कहा कि यहां न कोई सफाईकर्मी आता है और न कोई अधिकारी। हम खुद ही झाड़ू लगाते हैं, लेकिन जलभराव की वजह से कुछ नहीं हो पाता।
घरों के सामने फैली गंदगी
- फोटो : amar ujala
विकास कार्य अधर में, प्रशासन मौन
गौशाला के ग्रामीण भोला निषाद, गजराज निषाद, शोभित आदि ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व मिट्टी की भराई कराई गई थी, लेकिन उसके बाद से कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ। न सड़क बनी, न नाली, न ही कोई सफाई अभियान चला। अधिकारी और जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देते हैं।
गंदगी पार कर जाते ग्रामीण
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कई जगह हमेशा भरा रहता है गंदा पानी
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स्वच्छता अभियान की साख पर सवाल
जहां एक ओर सरकार स्वच्छता को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं दूसरी ओर गौशाला जैसे मजरे आज भी बुनियादी सफाई सुविधाओं से वंचित हैं। यह न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान की साख पर भी सवाल खड़े करता है।
गंदगी से अटा पड़ा तालाब
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ये हैं ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में सफाई अभियान चलाया जाए। जलनिकासी की व्यवस्था की जाए और सड़क व नाली निर्माण कराया जाए, ताकि वे भी स्वस्थ और स्वच्छ जीवन जी सकें।