कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर बच्चों के इंटेंसिव केयर पर पूरा जोर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नए पीआईसीयू बनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन उर्सला में संसाधन होते हुए भी बाल रोगियों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। उर्सला में पांच बालरोग विशेषज्ञ भी हैं। ओपीडी में हल्की-फुल्की बीमारियों के जो रोगी देखे जाते हैं, उन्हें पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कर लिया जाता है।
वेंटिलेटर कंडम होने की स्थिति में
वैसे उर्सला में इलाज कराने आने वाले बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं है कि यहां बच्चों का वार्ड भी है। इससे यहां ओपीडी की संख्या कम रहती है। उर्सला की नई बिल्डिंग के दो तलों पर 12-12 बेड के दो वार्ड हैं। बच्चों का वार्ड वर्ष-2011 में बना था। उसी दौरान बच्चों का छह बेड का आईसीयू बनाया गया था। दो बेड वेंटिलेटर युक्त थे, लेकिन 10 साल से ऑन ही नहीं किए गए। अब ये कंडम होने की स्थिति में हैं। डॉक्टरों ने सिरदर्द बचाने के चक्कर में कभी दिलचस्पी नहीं ली।
अस्पताल में इंटेंसिव केयर यूनिट है। इसमें दो वेंटिलेटर भी हैं, लेकिन एनेस्थेटिस्ट की कमी की वजह से चलती नहीं। अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट के पांच पद हैं, लेकिन एक ही है। सभी पद भर जाएं तो बच्चों का आईसीयू चल सकता है।
डॉ. अनिल निगम, सीएमएस, उर्सला