होली पर घर जाने की जल्दी में रविवार को कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर भारी भीड़ देखी गई। दोपहर 12 बजे से देर रात तक आने-जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या अत्यधिक रही। कोई ट्रेन में लटककर तो कोई शाैचालय में यात्रा करने को मजबूर रहे।
दोपहर करीब डेढ़ बजे कामाख्या-आनंदविहार एक्सप्रेस के आते ही भीड़ जनरल और स्लीपर कोचों में चढ़ने को दौड़ी। जनरल कोच के यात्रियों ने अंदर से दरवाजे बंद कर लिए थे। आरपीएफ और जीआरपी ने दरवाजा खुलवाया। बिहार और पूर्वांचल की ओर जाने वाली ट्रेनों पैर रखने की भी जगह नहीं थी। कामाख्या-आनंदविहार के जनरल कोच के शौचालय में भी यात्री घुसकर बैठे थे। कुछ लोग तो खिड़कियों से अंदर घुसे। दिल्ली और मुंबई रूटों से आने वाली ट्रेनों में भी भीड़ का यही आलम था। एनई, कालका मेल, जोगबनी और अजमेर सियालदह एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में स्लीपर और जनरल कोच की ऊपर वाली सीटों पर कुछ यात्री लटके हुए सफर करने को मजबूर रहे। कई यात्रियों ने अपने बच्चों को चादर बांधकर लिटा रखा था।
10-10 मिनट में बसें फुल
झकरकटी बस अड्डे पर भी दोपहर बाद भीड़ पहुंची। आलम यह था कि लखनऊ, बांदा और महोबा रूट की बसें 10-10 मिनट में फुल होकर गईं। दरवाजों से जगह न मिलने पर कुछ लोग खिड़की से अंदर घुसे। एआरएम पंकज तिवारी ने बताया कि नौ मार्च तक 350 अतिरिक्त बसों का संचालन होगा। हर रूट के लिए बसें चलाई जा रही हैं। किसी रूट पर यात्री लोड 30 से अधिक आता है तो तत्काल उस रूट पर दूसरी बस रवाना की जाएगी।