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ऐसे छलका मनोज कि मुंतशिर हो गया...

Mon, 24 Jul 2017 09:24 AM IST
दिलीप सिंह, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर में मनोज मुंतशिर की मास्टर क्लास - फोटो : अमर उजाला, कानपुर
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अमर उजाला की खास प्रस्तुति ‘मनोज मुंतशिर की मास्टर्स क्लास’ ने लोगों को दीवाना बना दिया।  खचाखच भरा हॉल और तालियों की गड़गड़ाहट। एक तरफ थी गीत-संगीत, शायरी और गजलों की बात तो दूसरी ओर झूमने को मजबूर कर देने वाले मुंतशिर बैंड के सुरों का जादू। जिसने भी देखा, दीवाना हो गया। कई की दीवानगी सवालों में दिखी तो कई की उनके गानों में। यूपी के एक गांव का साधारण सा लड़का कैसे मायानगरी में सितारा बन गया, उसकी तरह और युवा भी कैसे यह मुकाम हासिल कर सकते हैं, ये खुद बताया मनोज मुंतशिर ने। 
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रविवार शाम रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम का यही नजारा था। हो भी क्यों न, मेरे रश्के कमर..., तेरी गलियां, गलियां तेरी गलियां... तेरे संग यारा, खुशरंग बहारा... मैं फिर भी तुमको चाहूंगा... जैसे 200 से ज्यादा सुपरहिट गीतों को लिखने वाले कलम के बाहुबली मनोज मुंतशिर जो थे। शुरुआत मनोज द्वारा लिखे गए बाहुबली के गाने ‘गली गली तेरी लौ जली... जियो रे बाहुबली’ से हुई तो हर कोई झूमने को मजबूर हो गया। इसके बाद मनोज ने देश के कोने-कोने से आए अपने फैंस से संवाद किया। अमर उजाला टीवी हेड पंकज शुक्ला ने मंच का संचालन किया। मंच से मुंतशिर ने बताया कि किस तरह से बॉलीवुड में कॅरियर बनाया जा सकता है। क्रिएटिव राइटिंग के टिप्स दिए। मनोज ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पढ़ना भरना है.. लिखना छलकना है, आप भरे नहीं तो छलकना मुश्किल है। कहा कि अगर आप फिल्मों के लिए गाने लिखना चाहते हैं। कहानियां लिखना चाहते हैं और  शायरी लिखना चाहते हैं तो आपको हिंदी और उर्दू पर अच्छी पकड़ बनानी होगी। 

इसके पहले कार्यक्रम का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस दौरान एडीजी अविनाश चंद्र, आईजी आलोक सिंह, पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह, यूपीटीटीआई के डायरेक्टर प्रो. डीबी शाक्यवार आदि मौजूद रहे।
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जमीं पर रहो, सफलता जरूर मिलेगी
समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने युवाओं को सफलता के लिए जमीं पर रहने की सलाह दी। बोले, आपके अंदर काफी काबिलियत है। आप उसे अपनी मेहनत और ईमानदारी से निखार सकते हैं। उन्होंने मनोज मुंतशिर को यूपी का सितारा बताया। बोले, यूपी से ऐसे होनहार निकलकर दुनिया में यूपी का नाम रोशन कर रहे हैं। इसके लिए हम सभी को गर्व होना चाहिए।

ये थे स्पांसर
अमर उजाला मनोज मुंतशिर की मास्टर्स क्लास के आयोजन में टाइटिल स्पांसर वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन ट्रस्ट, टीवी पाटर्नर जेएमडी टीवी और रेडियो पार्टनर रेड एफएम 93.5 ने योगदान दिया।

सवाल- आपके हीरो कौन हैं
आरजे सुगंधा
जवाब- हमें किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए रोल मॉडल की सख्त जरूरत होती है, जिससे प्रेरणा लेकर हम आगे बढ़ते हैं। मेरे रोल मॉडल साहिर लुधियानवी थे। मैं इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था। एक दिन मैं इलाहाबाद जा रहा था। प्रतापगढ़ में ट्रेन खराब हो गई और इसी दौरान मैं कुछ देर के लिए स्टेशन के बुक स्टॉल पर खड़ा हो गया। तभी लुधियानवी जी की 16 रुपये की एक किताब खरीदी, बस उसी दिन से अमेठी का मनोज शुक्ला मुंबई का मुनोज मुंतशिर बन गया था। किताब पढ़ने के बाद ही मैंने तय किया कि मुझे मुंबई जाना है और फिल्मों में गाने लिखने हैं। इसके बाद डेढ़ सालों तक फुटपाथ पर सोया, संघर्ष किया। जिद और जुनून ने सफलता के इस मुकाम पर पहुंचाया।

सवाल- आपके लिखने की शुरुआत कैसे हुई
आनंद सिंह, इलाहाबाद
जवाब- लपक के जलते थे बिलकुल शरारे जैसे थे, जब हम नए-नए थे बिलकुल तुम्हारे जैसे थे... यह पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि कर्म और भाग्य का बड़ा रिश्ता है। एमएस धोनी: अनटोल्ड स्टोरी फिल्म के गाने लिख रहा था। इसी दौरान फिल्म निर्देशक एसएस मौली ने देखा और चले गए। इसके बाद बाहुबली-2 की स्क्रिप्ट और डायलॉग लिखने का मौका दिया। इसी तरह लेखन के क्षेत्र में भी है आपकी रचनाएं बेहतर हैं तो एक दिन आपको भी मौका जरूर मिलेगा।

सवाल - बहुत लंबे अंतराल में कुछ लिख पाता हूं। क्या मुझे सफलता मिल पाएगी
-अजय प्रकाश, पटना
जवाब- लिखना एक ऐसी कला है कि इसमें समय का कोई बंधन या दायरा नहीं है। मैं भी जब लिखता हूं तो काफी समय लगता है। लेखन का सिर्फ बेहतर रचनाओं से तात्पर्य है न कि समय के अंतराल से।

सवाल- मुंबई में यूपी और एमपी वालों को तवज्जो नहीं दी जाती है। ऐसे में शुरुआती दौर में मुंबई में कैसे कॅरियर बनाएं।
दीपक सिंह, मध्य प्रदेश रीवा
जवाब-आपको अपने ऊपर कॉन्फिडेंस होना चाहिए बस, मैं भी यूपी से हूं और मुंबई के लिए अकेले ही निकला था आज आपके सामने जीता-जागता उदाहरण हूं।

सवाल- वो हिम्मत कहां से आती है कि मुझे मुंबई जाना है लिखना है।
- शास्वत शुक्ला, लखनऊ
जवाब- आसमान में आंख लगाए क्यूं बैठे हो यारा, इक दिन तेरे अंदर खुद चमकेगा तारा... यह पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि जब आप के अंदर शायरी सिर उठाएगी तो आप खुद को रोक नहीं पाओगे।

सवाल-मैं एक अच्छा स्क्रिप्ट राइटर बनना चाहता हूं, इसके लिए क्या करना होगा।
- गौरव चंद्रा, इलाहाबाद
जवाब- मैंने तो फिलहाल एक ही स्क्रिप्ट लिखी है लेकिन मैं सिर्फ आपको ये बताना चाहता हूं कि लिखने के लिए प्यार, इश्क और मोहब्बत का मतलब समझना होगा। इस दर्द से गुजरे बगैर लिखना मुश्किल है।

सवाल-सवाल- कुछ लिखने पर ऐसा लगता है कि ये रचना अच्छी है या खराब, लोग क्या कहेंगे?
निर्भय शुक्ला
जवाब- किसी के हंसने पर न जाएं। लेखक इन सब चिंताओं से दूर होगा तभी कुछ बेहतर लिख पाएगा। किसी के हंसने की चिंता नहीं करनी चाहिए।

सवाल- आज के समय में तो काबिलियत से ज्यादा डिग्री-डिप्लोमा की जरूरत होती है, इसके लिए हमें कौन सी पढ़ाई करनी होगी।
- स्वाती, कानपुर
जवाब-लेखन एक ऐसा क्षेत्र है जहां किसी डिग्री-डिप्लोमा की जरूरत नहीं होती है। बस लिखने का जुनून और सीखने की ललक होनी चाहिए। तभी तो अमेठी के एक छोटे से गांव का बेटा आज बगैर डिग्री-डिप्लोमा के आज इतना कुछ लिख सका है।
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सवाल- घर वाले कहते हैं कि लड़की हो तुम्हारा बाहर निकलना ठीक नहीं है। ऐसे में मुझे क्या करना होगा?
कविता गुप्ता, कानपुर
जवाब- दुनिया कितनी अच्छी है या खराब यह सब आप पर निर्भर करता है। इसलिए बेटियों को ऐसा बिलकुल नहीं सोचना चाहिए।
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