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Kanpur: 45 से 60 वर्ष के लोगों को होता है अधिक तनाव, डायबिटीज हो जाती है अनियंत्रित, होने लगते हैं दूसरे रोग

Sat, 07 Jun 2025 05:02 PM IST
हिमांशु अवस्थी रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: मल्टी सुपर स्पेशियलटी हॉस्पिटल के इंडोक्रोनोलॉजी क्लीनिक प्रभारी डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि मल्टी सुपर स्पेशियलिटी और हैलट की मेडिसिन ओपीडी दोनों जगहों पर आने वाले डायबिटीज के रोगियों में एक जैसी स्थिति मिली है।
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हैलट हॉस्पिट कानपुर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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45 साल से 60 वर्ष के बीच की उम्र ऐसी है, जिसमें लोगों को सबसे अधिक तनाव होता है। इस वर्ग के डायबिटिक लोगों में सबसे अधिक ब्लड शुगर लेवल बढ़ा मिला है। इस उम्र में डायबिटीज अनियंत्रित रहने के साथ दूसरे रोग होने लगते हैं। यह तथ्य इंडोक्रोनोलॉजी क्लीनिक के सैंपल सर्वे में सामने आया है। इसके मुख्य कारणों में तनाव, खानपान, इलाज में लापरवाही और व्यायाम की कमी मिली है।

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सैंपल सर्वे में पाया गया कि 45 साल से कम और 60 साल से अधिक आयु के रोगी अधिक सतर्क रहते हैं। डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए अधिक ध्यान देते हैं। 45 साल से कम वाले व्यायाम पर अधिक ध्यान देते हैं। 60 साल से अधिक वाले खानपान नियंत्रित रखते हैं और दवाओं को लेकर सजग रहते हैं। इसके बीच वाला रोगियों का तबका सबसे अधिक रोग प्रभावित रहता है।

डायबिटीज के रोगियों में एक जैसी स्थिति मिली
रोगियों की डायग्नोसिस तैयार करने में उनका खानपान और दिनचर्या का भी ब्योरा लिया गया। 45 से 60 वर्ष आयु वाले रोगी डॉक्टर को फीड बैक देने में भी लापरवाही बरतते हैं। इनकी पैथोलॉजिकल जांचों में भी अधिक गड़बड़ी मिलती है। मल्टी सुपर स्पेशियलटी हॉस्पिटल के इंडोक्रोनोलॉजी क्लीनिक प्रभारी डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि मल्टी सुपर स्पेशियलिटी और हैलट की मेडिसिन ओपीडी दोनों जगहों पर आने वाले डायबिटीज के रोगियों में एक जैसी स्थिति मिली है।

हैलट का वार्ड-50 - फोटो : amar ujala
45 से 60 वर्ष के लोगों में होता है अधिक तनाव
महीने में डायबिटीज के 300 रोगी आते हैं। इनमें 50 फीसदी रोगी 45 से 60 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं। इनका ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित मिलता है। इनकी हिस्ट्री से पता चला कि इस आयु वर्ग के रोगी सबसे अधिक मानसिक तनाव में रहते हैं। इसके साथ ही इन पर काम का दबाव अधिक होता है। इनका खानपान बिगड़ा रहता है। इसके अलावा इस उम्र में पैंक्रियाज में बीटा कोशिकाओं की संख्या बहुत कम हो जाती है। 50 प्रतिशत बीटा सेल क्षतिग्रस्त होने के बाद ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है। इंसुलिन रिसेंस्टेंट भी बढ़ जाता है, इससे ग्लूकोज की खपत नहीं हो पाती।
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इसलिए होता है अधिक तनाव
इस आयु वर्ग के लोग सेहत को लेकर चिंतित जरूर रहते हैं लेकिन परहेज नहीं कर पाते। काम के अलावा बच्चों के भविष्य को लेकर इनको चिंता सबसे अधिक होती है। इस वर्ग के लोगों पर उनके बुजुर्ग माता-पिता की भी जिम्मेदारी रहती है। साथ ही सेवानिवृत्ति की उम्र को नजदीक देख उनका स्ट्रेस लेवल बढ़ा रहता है।
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