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बिल और फोटो पोर्टल पर अपलोड करना होता है
नियमानुसार 10 लाख रुपये से अधिक के कार्यों के प्रस्ताव पर डीपीआरओ, सीडीओ और आवश्यकतानुसार जिलाधिकारी स्तर से स्वीकृति के बाद ही काम कराया जाता है। कार्य पूरा होने के बाद बिल और फोटो पोर्टल पर अपलोड करना होता है। जांच के बाद लेखाकार और खंड विकास अधिकारी की निगरानी में भुगतान होता है।
विभागीय अधिकारियों में हड़कंप
लेकिन भीतरगांव में पोर्टल पर दर्ज कार्यों को देखें, तो कई में 10 लाख रुपये की सीमा पार कर भुगतान किया गया है। यही नहीं कई कार्यों की एक आईडी बनाई गई लेकिन पोर्टल पर भुगतान को दो हिस्सों में बांटकर दर्ज कर दिया। इस खुलासे के बाद से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
10 लाख से अधिक के इन कार्यों का नियम की अनदेखी कर हुआ भुगतान
- रसूलपुर जाजपुर में जय सिंह के घर से रामनिवास के घर तक सड़क निर्माण कार्य 10.33 लाख रुपये से कराया गया।
- सिहुपुर प्राथमिक विद्यालय के बाहर राजन शुक्ला के घर से सोनेलाल के घर तक डामर सड़क निर्माण कार्य 10.37 लाख रुपये से कराया गया।
- कुड़नी में बीएएमए इंटर कॉलेज के बाहर डामर रोड का निर्माण कार्य 11 लाख से अधिक की राशि से कराया गया।
- शाखारी में हीरालाल के घर तक सड़क निर्माण कार्य 11.35 लाख रुपये से कराया गया।
- बैजूपुर में शिवम के घर से विजय प्रताप के घर तक सड़क व नाली निर्माण कार्य 11.39 लाख रुपये से कराया गया।
- कुड़नी में अरविंद कुशवाहा के घर से श्रीराम के घर तक सड़क व नाली निर्माण कार्य 11.43 लाख रुपये से कराया गया।
- शाह गांव में रतिराम के घर से जलिया देवी मंदिर तक इंटरलॉकिंग कार्य 14.74 लाख रुपये से कराया गया।
- कैटल कैचिंग के नाम पर करीब 14 लाख रुपये खर्च दिखाया गया।
अगर नियमों का उल्लंघन कर किसी भी काम का भुगतान किया गया है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। -अभिनव जे जैन, सीडीओ