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Kanpur: पुरवामीर और आसपास के गांवों में दहशत, पानी में 36 प्रतिशत क्रोमियम, 30 हजार की आबादी प्रभावित

Tue, 28 Jul 2026 09:45 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव के पास क्रोमियम युक्त कचरा मिलने से बड़ा पर्यावरणीय संकट खड़ा हो गया है। इसके प्रभाव से फतेहपुर सीमा से लगे पांच गांवों के हैंडपंपों का पानी जहरीला हो गया है, जिससे लगभग 30 हजार की आबादी प्रभावित है और लोग टैंकर के पानी पर निर्भर हैं। मामले की जांच के लिए मंगलवार को लखनऊ से विशेष टीम पहुंचेगी।
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छिवली गांव में हैंड पाइपों पर लगा लाल निशान - फोटो : amar ujala
कानपुर में क्रोमियम युक्त कचरा फेंके जाने के कारण पुरवामीर गांव के इर्द-गिर्द के फतेहपुर जिले के पांच गांवों के हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। इससे लगभग छह किलोमीटर के दायरे की तकरीबन 30 हजार लोगों की आबादी प्रभावित हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने चिह्नित पांच गांवों के हैंडपंप पर लाल रंग का निशान लगाकर लिखा है कि इसका पानी पीने योग्य नहीं है।


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इन गांवों के ग्रामीण अब पीने के पानी के लिए टैंकर के सहारे हैं। वहीं, कचरे की जांच के लिए लखनऊ स्तर पर गठित मंगलवार को जांच के लिए आएगी। महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव निवासी राजेश पाल के खेत के समीप 18 जुलाई की सुबह हरे रंग का कचरे का ढेर लगा मिला था। ग्रामीणों ने कचरा क्रोमियम युक्त होने की आशंका जताई, तो पुलिस-प्रशासन की टीम और फिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी पहुंचे।
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छिवली गांव में सबमर्सिबल से निकलता दूषित पानी - फोटो : amar ujala
हैंडपंप पर लाल निशान लगाया
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कचरे और उसके समीप बहने वाले पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा। जांच में सामने आया कि कचरे और पानी में हानिकारक क्रोमियम मौजूद है। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने पुरवामीर से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित फतेहपुर के छिवली, आशापुर, अभयपुर, गोधरौली और बनियाखेडा गांव के हैंडपंप पर लाल निशान लगाकर पानी पीने योग्य न होना बताया।
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क्रोमियम युक्त कचरे का सैंपल लेते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी - फोटो : amar ujala
पुरवामीर गांव के ग्रामीण भी सहमे
ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में लगभग दो दशक से कारखाने संचालित थे। वर्ष 2023 से हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप का पीला आने लगा तो शिकायत की गई। एनजीटी ने संज्ञान लिया तो कारखाने बंद हुए, लेकिन पानी की स्थिति में सुधार नहीं आया। छिवली सहित पांच अन्य गांवों के हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप की स्थिति देख कर अब पुरवामीर गांव के ग्रामीण भी सहमे हुए हैं।

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क्रोमियम युक्त कचरे का सैंपल लेते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी - फोटो : amar ujala
सात जगह पर क्रोमियम युक्त कचरा पड़ा होने की पुष्टि
ग्रामीणों का कहना है कि जब तीन किलोमीटर दूर छिवली का भूगर्भ जल प्रदूषित हो सकता है तो यहां की स्थिति भी जल्द खराब हो सकती है। महाराजपुर क्षेत्र में अब तक सात जगह पर क्रोमियम युक्त कचरा पड़ा होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद उसके निस्तारण का प्रबंध नहीं किया जा सका है।
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बारिश के पानी में तेजी से फैल रहा क्रोमियम युक्त हरा कचरा - फोटो : amar ujala
पुरवामीर गांव में मिले मलबे में क्रोमियम पाया गया है। यहां पानी में 36 और सॉलिड वेस्ट में 37 प्रतिशत क्रोमियम मिला है। इसके निस्तारण के लिए लखनऊ मुख्यालय स्तर से एक जांच कमेटी बनाई गई है जो मंगलवार को आएगी। टीम जांच करेगी कि किस कंपनी ने कचरा फेंका है। जो भी कंपनी दोषी मिलेगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कचरे के निस्तारण का खर्च भी वही कंपनी ही वहन करेगी।  -अजीत कुमार सुमन, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड
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क्रोमियम युक्त कचरे का सैंपल लेते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी - फोटो : amar ujala
क्रोमियम के दो मुख्य रूप होते हैं, क्रोमियम ट्राइवैलेंट और हेक्सावेलेंट। इसमें हेक्सावेलेंट क्रोमियम सबसे विषैला होता है। इसके साइड इफेक्ट्स काफी होते हैं। ये पानी में जाता है तो जलीय जीव-जंतु, मिट्टी में जाता है तो पेड़ पौधों और हवा में जाता है तो मनुष्यों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाता है। लेदर इंडस्ट्री द्वारा बिना ट्रीटमेंट के कचरा बहाने से यह भूजल में घुलकर उसे जहरीला बना देता है। पानी में इसकी मौजूदगी पाए जाने पर तुरंत कड़े कदम उठाने की जरूरत है। दूषित पानी का लंबे समय तक सेवन करने या संपर्क में आने से पेट दर्द, त्वचा रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यह प्रदूषण केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। यह पौधों की वृद्धि रोकता है और फसलों की सिंचाई के जरिये ये हमारे भोजन तक पहुंच जाता है। पानी में जलीय जीवों के विकास को बाधित करने के साथ, सी-फूड के जरिये ये इंसानों में पहुंचकर अगली पीढ़ी के लिए भी बड़ा खतरा बनता है। इसे फैलने से रोकने के लिए प्रदूषण के स्रोत पर ही त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।  -डॉ. द्रौपदी यादव, कोऑर्डिनेटर, पर्यावरण विज्ञान विभाग, स्कूल ऑफ बेसिक साइंस, सीएसजेएमयू
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