GSVMC Eye Treatment: कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग ने इलाज की नई विधि खोजी है। डायबिटीज के रोगियों की शुगर नहीं बढ़ेगी। रोशनी भी सुरक्षित रहेगी। डायबिटिक रेटिनोपैथी में सीधे आंख में स्टीरॉयड दी जाएगी।
डायबिटीज के रोगियों के लिए अच्छी खबर है। ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित रहने की वजह से डायबिटिक रेटिनोपैथी से उन्हें आंख की रोशनी नहीं गंवानी पड़ेगी। रेटिनोपैथी के इलाज में उन्हें हर महीने 25 से 50 हजार रुपये के बीच कीमत का महंगा इंजेक्शन भी नहीं लगवाना पड़ेगा।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की नई विधि से आंखों में सीधे स्टीरॉयड देने से डायबिटीज अनियंत्रित रहने पर भी रोगियों की आंख की रोशनी सुरक्षित रहेगी। इलाज भी मुफ्त मिलेगा।
ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित रहने से डायबिटीज के रोगियों के आंख के परदे में सूजन आ जाती है। इसे रेटिनोपैथी कहते हैं। इससे परदा खराब होकर उखड़ने लगता है और आंख की रोशनी चली जाती है। इसके इलाज में महंगा इंजेक्शन हर महीने लगाया जाता है।
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बहुत से रोगियों को इस दवा से भी फायदा नहीं होता और आंख रोशनी चली जाती है। सूजन कम करने के लिए स्टीरॉयड की जरूरत होती है। डायबिटीज के रोगी को स्टीरॉयड देने से ब्लड शुगर लेवल और बढ़ता है। रेटिनोपैथी के इलाज में यह स्थिति बड़ी बाधा है।
नई विधि में इसी बाधा को दूर किया गया। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज खान ने विधि खोजी है। डॉ. खान ने बताया कि स्टीरॉयड को सीधे रोगी के आंख के परदे के सुप्रा कोराइडल स्पेस में पहुंचा दिया जाता है।
यहीं पर सूजन होती है। इससे स्टीरॉयड का असर शरीर के किसी दूसरे हिस्से में नहीं होता है। दवा से सूजन ठीक होने लगती है और आंख का परदा खराब नहीं होता। रोशनी भी बच जाती है। इस विधि में उनकी पेटेंट परवेज नीडिल का इस्तेमाल किया जाता है।
आठ रोगियों पर पहला ट्रायल सफल
नई विधि का आठ रोगियों पर पहला ट्रायल किया गया है। इनको रेटिनोपैथी हो गई थी और आंख की रोशनी प्रभावित थी। इस विधि से इलाज के बाद रोगियों की आंख की रोशनी ठीक हो गई। ट्रायल के दौरान भी इन रोगियों का ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित रहा है, लेकिन इलाज के कारण रोगियों की आंख रोशनी पर फर्क नहीं पड़ा। डॉ. परवेज ने बताया कि अब इस विधि पर विस्तृत शोध कर दिया गया है। रोगियों को इलाज मुफ्त है।
हर महीने ओपीडी में आते औसत 250 रोगी
हैलट के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में हर महीने डायबिटिक रेटिनोपैथी के औसत 250 रोगी आते हैं। रेटिनोपैथी की ओपीडी में आने वाले इन रोगियों में 50 फीसदी को पता नहीं होता कि ब्लड शुगर लेवल बढ़ा रहता है। आंख की रोशनी कम होने पर दिखाने आते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है तो डायबिटीज होने के 30 साल तक रेटिनोपैथी नहीं होती। अगर ब्लड शुगर लेवल बढ़ा रहता तो 10 साल के अंदर रेटिना में बदलाव आने लगते हैं। रेटिनोपैथी के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।