ठंडक बढ़ने पर ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में इजाफा
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में ब्लड प्रेशर की दवा बीच में छोड़ देने या गर्मी में निश्चित की गई दवा की खुराक जाड़े में लेते रहने से ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है। इससे ब्रेन स्ट्रोक की नौबत आ जाती है। डायबिटीज रोगियों को खतरा अधिक रहता है। उनकी नसें पतली होने और अंदरूनी पर्त खुरदुरी होने से हाई ब्लड प्रेशर होने पर खून का थक्का जम जाता है। इससे ब्रेन स्ट्रोक होता है। न्यूरो साइंस प्रमुख प्रोफेसर सिंह का कहना है कि अब वर्ष भर इक्का-दुक्का रोगी आते रहते हैं, लेकिन ठंडक बढ़ने पर इनकी संख्या में इजाफा हो जाता है।
बीपी से गुर्दा रोगियों को भी रहता खतरा
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी के मुताबिक हैलट इमरजेंसी में गुर्दा फेल के औसत तीन-चार रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। इनमें क्रोनिक किडनी डिजीज के रोगी अधिक होते हैं। बीपी हाई रहने पर गुर्दा खराब होता है। रोगियों को डायबिटीज और बीपी नियंत्रित रखना चाहिए।
बीपी ने हार्ट अटैक के रोगी भी बढ़ाए
एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमेश्वर पांडेय ने बताया कि हाई बीपी से ब्रेन स्ट्रोक के साथ ही हार्ट अटैक के रोगी भी बढ़ गए हैं। हार्ट अटैक के लक्षण लेकर इमरजेंसी में आने वाले रोगियों की संख्या 20 फीसदी बढ़ी है। ठंडक आने पर रोगी बीपी की दवा की खुराक दुरुस्त नहीं कराते।