याचिकाकर्ता के विरुद्ध विशिष्ट आरोप नहीं थे
उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि आदेश में यह दर्ज नहीं किया गया कि आरोप साबित होने पर बड़े दंड की संभावना है जो निलंबन के लिए आवश्यक है। कोर्ट ने परीक्षण में पाया कि निर्माण कार्यों को लेकर याचिकाकर्ता के विरुद्ध विशिष्ट आरोप नहीं थे। न्यायाधीश पंकज भाटिया की पीठ ने छह अक्तूबर को निलंबन आदेश को त्रुटिपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया।
इस मामले में की थी कार्रवाई
नगर निगम में फर्म पंजीकरण, टेंडर प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं की गोपनीय विभागीय जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता (सिविल) आकाशदीप और बालेंद्र प्रताप सिंह पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया था। 11 सितंबर को शासन ने आदेश जारी किए और दोनों को निलंबित कर दिया था। बालेंद्र प्रताप सिंह पर जोन-6 के वार्ड-17 अंतर्गत खेड़ा गांव की आंतरिक गलियों की मरम्मत कार्य में निगरानी न करने का आरोप है।
नगर निगम में वर्षों से चल रहा घोटाला
कानपुर नगर निगम में टेंडर हासिल करने और फर्म पंजीकरण में वर्षों से घोटाला चला आ रहा है। अगस्त में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर नगर निगम के भ्रष्टाचार पर बयान दिया तो नगर निगम में करीब 120 करोड़ का टेंडर घोटाला का मामला उजागर हुआ।
अधूरी कार्रवाई का लाभ उठा रहे हैं आरोपी
ठेकेदारों फर्मों को ब्लैकलिस्टेड करने के साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई गई। दो ठेकेदार जेल गए, तो नगर निगम के दो अवर अभियंताओं के निलंबन के साथ कई कर्मी इधर से उधर भी किए गए। अब जल्दबाजी में आधी-अधूरी कागजी कार्रवाई करने पर सवाल उठ रहे हैं। आरोपी बनाए गए लोग अधूरी कार्रवाई का लाभ उठा रहे हैं।
मामले में अभी भी जांच जारी है। कई अधिकारी और कर्मचारी घेरे में हैं, कई फर्मों पर भी शिकंजा कसेगा। कोर्ट के आदेशों पर अधिवक्ताओं से राय ली जा रही है। आरोपी कोई भी हो, बच नहीं पाएगा। -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त