अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से कानपुर के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के बैंक खातों पर नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) का खतरा मंडरा रहा है। युद्ध के कारण औद्योगिक उत्पादन में संकट और कच्चे माल व ईंधन की कमी जैसी चुनौतियां पहले से ही थीं। अब निर्यात की गई खेप के भुगतान में देरी से यह नई समस्या उत्पन्न हो गई है।
शहर में करीब 800 से एक हजार से ज्यादा एमएसएमई इकाइयों के सामने ऐसी स्थिति जल्द देखने को मिल सकती है। उद्योग संगठन सरकार से भुगतान की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों की ओर से निर्यात किए गए माल का भुगतान 45 दिनों के भीतर होना अनिवार्य है। इस अवधि में भुगतान न होने पर बैंक खाते को एनपीए घोषित कर देते हैं। एनपीए होने पर बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाते हैं, जिससे सभी लेनदेन रुक जाते हैं।