अहोई अष्टमी पर रविवार को माताओं ने संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और तरक्की के लिए व्रत रखा। महिलाओं ने अहोई माता की कथा सुनी और घरों में पकवान बनाकर माता को भोग लगाया। दीवारों पर गेरू से अहोई माता, सेह और उसके सात पुत्रों के चित्र बनाए। शाम को तारों के दर्शन कर अर्घ्य दिया और आरती के बाद व्रत का पारण किया। यह पर्व करवा चौथ के चार दिन बाद मनाया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पवन तिवारी ने बताया कि संतान प्राप्ति की इच्छुक महिलाएं भी यह व्रत रखती हैं। इसके अलावा संतान के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान माताएं भी उनके कल्याण की कामना से व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि अहोई माता की पूजा और विशेष उपाय करने से संतान को सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।