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पुरवामीर कांड: क्रूरता के शिकार मासूमों का मेडिकल टेस्ट, बंधुआ मजदूरी कराने पहुंचे ढोंगी समाजसेवी बेनकाब

Wed, 20 May 2026 03:42 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: महाराजपुर के पुरवामीर में पीड़ित चार बच्चों का एसडीएम के निर्देश पर सरसौल सीएचसी की टीम ने मेडिकल परीक्षण किया। इस बीच, बच्चों को बहलाकर मजदूरी कराने की कोशिश करने वाले एक तथाकथित समाजसेवी को बच्चों ने ही बेनकाब कर दिया।
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क्रूरता का शिकार बने चारों बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में महाराजपुर के पुरवामीर गांव में चाचा‑चाची की क्रूरता का शिकार बने चारों बच्चों का बुधवार को एसडीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। सरसौल सीएचसी से पहुंचे डॉक्टर अरुणेंद्र ने बताया कि इस समय बच्चे मानसिक रूप से सबसे अधिक परेशान हैं।

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उन्होंने कहा कि दवा के साथ खेलने‑कूदने की आज़ादी और खुला वातावरण बच्चों के लिए सबसे बड़ी ज़रूरत है।  डॉक्टर ने समझाया कि बच्चों को प्रोत्साहन देना ही सबसे बड़ी दवा है। उन्होंने कहा कि एक समय भोजन न मिले तो भी हिम्मत और आत्मविश्वास बहुत जरूरी है।

चाचा-चाची द्वारा प्रताड़ित अनाथ बच्चों का मामला - फोटो : amar ujala
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चारों बच्चों का सैंपल लिया गया है

बच्चों को आम लोगों, अध्यापकों और डॉक्टरों से मिलाना चाहिए, ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े। इलाज के साथ खेलकूद और खुला वातावरण उन्हें क्रूरता भरे जीवन को पीछे छोड़ आगे बढ़ने की ताकत देगा। चारों बच्चों का सैंपल लिया गया है और खून सहित कई तरह की जांचें कराई गई हैं।

चाचा-चाची द्वारा प्रताड़ित अनाथ बच्चों का मामला - फोटो : amar ujala
आपदा में अवसर तलाश रहे ढोंगी समाजसेवी
एक ओर जहां लोग मासूम बच्चों की मदद के लिए लगातार हाथ आगे बढ़ा रहे है। शासन-प्रशासन भी अपने स्तर पर बच्चों की मदद के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। वहीं, कुछ शहर से कुछ ऐसे भी समाजसेवी बच्चों के पास पहुंच रहे है, जो उनको बंधुआ मजदूरी कराना चाहते है और मजदूरी देकर काम कराना चाहते है।
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चाचा-चाची द्वारा प्रताड़ित अनाथ बच्चों का मामला - फोटो : amar ujala
महोदय मात्र सौ रुपये देते चलते बने
बुधवार को पहुंचे एक समाजसेवी ने सबसे बड़े किशोर से कहा कि हमारे घर चलो काम करना पांच हजार रुपये प्रतिमाह देंगे। जब किशोर ने अन्य तीन बच्चों का हवाला देते हुए कहा कि इनकी देखभाल कौन करेगा। इनको भी साथ लेते चले, तो महोदय बच्चों को मात्र सौ रुपये देते हुए वहां से चलते बने।
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