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UP: 20 साल में पुरुषों में बढ़ा 30 फीसदी नपुंसकता, विशेषज्ञ बोले- सोशल मीडिया नुस्खों से घट रहा स्पर्म काउंट

Sun, 09 Nov 2025 12:10 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया की यूपी एएसआईकॉन-2025 में विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले 20 वर्षों मं पुरुषों में नपुंसकता के रोगी 30% तक बढ़े हैं। इसका मुख्य कारण अत्यधिक मानसिक तनाव और सोशल मीडिया पर बताए जा रहे यौनवर्धक नुस्खों का सेवन है।
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स्पर्म काउंट - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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पुरुषों में नपुंसकता की समस्या बढ़ रही है। 20 वर्षों में पुरुष नपुंसकता के रोगी 30 फीसदी बढ़े हैं। इनमें शुक्राणुओं की संख्या कम हो रही है। शुक्राणुओं की क्वालिटी भी गिरती जा रही है। एसोसिएशन सर्जंस ऑफ इंडिया की यूपी एएसआईकॉन-2025 में विशेषज्ञों ने बताया कि तनाव से नपुंसकता की समस्या बढ़ी है। सोशल मीडिया पर बताए जा रहे यौनवर्धक नुस्खों के सेवन से युवाओं में शुक्राणुओं का प्रतिशत घट रहा है।

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बिठूर के एक होटल में आयोजित यूपी एएसआईकॉन के दूसरे दिन डॉ. मो. असलम ने बताया कि मस्तिष्क में हाइपोथैलेमस के नीचे पिटयूटरी ग्रंथि होती है। इसके हार्मोस के रिसाव का प्रभाव अंडकोष पर आता है और शुक्राणुओं का निर्माण होता है। अत्यधिक मानसिक तनाव के प्रभाव से पिटयूटरी ग्रंथि का रिसाव प्रभावित होता है। इससे शुक्राणुओं की क्वालिटी और संख्या प्रभावित होती है।

29 फीसदी केस में हो जाता है गर्भधारण
अंडकोष के कार्य को टेस्टीस्टेरोन, एफएसएच, एलएच हार्मोन प्रभावित करते हैं। इनका संतुलन बिगड़ने से स्पर्म काउंट घट जाता है। ऐसे में अगर किसी दंपती के बच्चे नहीं हो रहे हैं, तो पति और पत्नी दोनों को जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि लो स्पर्म काउंट के मामले में विशेष तकनीक अपनाने पर 29 फीसदी केस में गर्भधारण हो जाता है।
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बांझपन का शिकार लोग इलाज से ठीक हो जा रहे हैं
पिटयूटरी ग्रंथि में ट्यूमर, जेनेटिक डिस्ऑर्डर से भी स्पर्म काउंट प्रभावित होता है। अपने मन से मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाने वालों, गांजा, धूम्रपान और दूसरे नशे लेने वालों का भी स्पर्म काउंट नीचे आ जाता है। नशा स्पर्म की क्वॉलिटी को घटा देता है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के नुस्खों का इस्तेमाल करने से बांझपन का शिकार लोग इलाज से ठीक हो जा रहे हैं।
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