इन परिस्थितियों ने बाजार को कम आकर्षक बनाया
सितंबर की गिरावट के प्रमुख कारणों में अमेरिका-ईरान टकराव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी शामिल रही। इन परिस्थितियों ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को अपेक्षाकृत कम आकर्षक बनाया। अगस्त में एनएसई के कैश सेगमेंट में कानपुर की हिस्सेदारी करीब 0.20 प्रतिशत और बीएसई में करीब 0.04 प्रतिशत रही।
पोर्टफोलियो पर अधिक पड़ सकता है असर
शहर में वायदा कारोबार कैश सेगमेंट की तुलना में कई गुना अधिक है। ऐसे में तेज उतार-चढ़ाव का असर सक्रिय ट्रेडर्स के पोर्टफोलियो पर अधिक पड़ सकता है। देश के कुल म्यूचुअल फंड एयूएम में कानपुर की हिस्सेदारी करीब 0.49 प्रतिशत है। इसके अलावा यूलिप जैसी बाजार आधारित बीमा योजनाओं में भी शहर के निवेशकों की बड़ी रकम लगी है।
बाजार गिरा, निवेशक बढ़े
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के अनुसार पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश में करीब 4.25 लाख नए निवेशक जुड़े। कानपुर में यह संख्या करीब 20 हजार रही। इससे संकेत मिलता है कि गिरावट के बावजूद इक्विटी और बाजार आधारित निवेश के प्रति रुचि बनी हुई है। वित्तीय वर्ष में अप्रैल के बाद से गिरावट जारी है और सितंबर में यह सबसे अधिक रही।
महीना गिरावट
मई 801 करोड़
जून 5,006 करोड़
जुलाई 7,619 करोड़
अगस्त 2,286 करोड़
सितंबर 10,167 करोड़