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Kanpur: 22 दिन बाद भी अधर में क्रोमियम जांच, महाराजपुर में जस की तस पड़ा जहरीला कचरा

Mon, 10 Aug 2026 11:20 AM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

Kanpur News: महाराजपुर क्षेत्र में खुले में पड़ा क्रोमियम युक्त जहरीला कचरा हटाने और इसकी जांच को लेकर अधिकारियों के आदेश बेअसर नजर आ रहे हैं। 22 दिन बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट अधर में है और पुरवामीर समेत कई गांवों में कचरा जस का तस पड़ा है।
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दीवारों पर दिखता जहरीले क्रोमियम का असर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर का महाराजपुर क्षेत्र क्रोमियम कचरे का डंपिंग यार्ड बन चुका है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग, एनजीटी, विधानसभा अध्यक्ष से लेकर लखनऊ के आला अधिकारियों तक ने इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लिया था।

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लखनऊ निदेशालय द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच टीम ने दावा किया था कि सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपकर कचरा हटा दिया जाएगा। लेकिन 22 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और जांच की फाइलें अफसरों की टेबल पर धूल फांक रही हैं।

दीवारों पर दिखता जहरीले क्रोमियम का असर - फोटो : amar ujala

कई गांवों में फैला जहरीला कचरा, बारिश से बढ़ा खतरा

पुरवामीर, महोली, महुआ, तिवारीपुर और रूमा समेत कई गांवों में क्रोमियम युक्त जहरीला कचरा खुले आसमान नीचे पड़ा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण यह कचरा बहकर नए इलाकों तक पहुंच गया है।

हालांकि जांच टीम ने मौके पर स्वीकार किया था कि यह कचरा बेहद खतरनाक है, लेकिन इसके बावजूद न तो इसे हटाया गया और न ही जिम्मेदार तंत्र पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

डंप क्रोमियम - फोटो : amar ujala

दिखने लगा जहरीला असर, बोरिंग खराब और दीवारें क्षतिग्रस्त

क्रोमियम के इस कचरे का घातक असर अब धरातल पर साफ दिखने लगा है। पुरवामीर स्थित तरंग रेस्टोरेंट की एक बोरिंग खराब हो चुकी है, वहीं पास के सिद्धि फिलिंग स्टेशन की दीवारों से हरा-पीला रंग उतरने लगा है और दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। हाईवे किनारे लगे पेड़-पौधे सूख रहे हैं। धूल के साथ हवा में उड़ता क्रोमियम लोगों के सांसों में घुल रहा है, जिससे बड़े स्वास्थ्य संकट की आशंका गहरा गई है।

ग्रामीणों में गुस्सा, पशुओं की सुरक्षा के लिए दे रहे पहरा

प्रशासनिक उपेक्षा से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि जब कचरा उठाना ही नहीं था, तो बड़ी जांच टीम और लवाजमा लाकर दिखावा करने की क्या आवश्यकता थी।

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बेजुबान पशुओं को इस जहरीले कचरे से बचाने के लिए ग्रामीण अब दिन-रात पहरा देने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक कर कचरा हटाया जाए, अन्यथा वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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