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कानपुर: लॉकडाउन में चमड़ा कारोबारियों को 200 करोड़ की चोट, टेनरियों में रखा 80 फीसदी माल खराब हुआ

Thu, 21 May 2020 08:39 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गूगल
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कोरोना महामारी की वजह से बीते 60 दिनों से चल रही संपूर्ण बंदी में कानपुर और उन्नाव की 300 से अधिक टेनरियों में 200 करोड़ रुपये से अधिक का कच्चा चमड़ा सड़ गया है। बीते दिनों प्रशासन से टेनरियां खोलने की अनुमति मिली तो इस नुकसान का पता चला। कारोबारी एक दूसरे से अपना दर्द बता रहे हैं। बड़ी परेशानी ये है कि बचाखुचा माल भी सड़ेगा, क्योंकि श्रमिकों की कमी की वजह से तत्काल उत्पादन शुरू कर पाना संभव नहीं है। पहले से संकट में चल रहे कारोबारियों के लिए यह कोढ़ में खाज जैसा है। 
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 टेनरियां खुलने के बाद चमड़ा कारोबारियों ने एक-दूसरे से अपना नुकसान साझा किया तो चर्म निर्यात परिषद हरकत में आया। परिषद ने कानपुर और उन्नाव जिले के कारोबारियों से आंकड़े जुटाए तो पता चला कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन सभी कारोबारियों के पास कुल 250 करोड़ रुपये मूल्य की जानवरों की खालें थीं। इनकी प्रोसेसिंग करके चमड़ा बनाया जाना था। 22 मार्च से अब तक टेनरियां, कारखाने और गोदाम बंद रहने से 80 फीसदी माल खराब हो गया।

इन कारोबारियों में से किसी के पास 10 लाख का माल था तो किसी के पास दो करोड़ का। बड़े पैमाने पर जानवरों की खालें प्रोसेसिंग के लिए ड्रमों में पड़ी थीं तो कुछ सूख रही थीं। लाखों पीस कच्चा चमड़ा बनकर तैयार होना था। तमाम माल कच्चे चमड़े से तैयार चमड़े में बनने की प्रक्रिया में था। टेनरियों की साफ सफाई के दौरान तमाम कारोबारियों ने सड़े माल को जमीन में दफना दिया है ताकि संक्रमण न फैले।
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बंदरगाह में भी फंसा माल
इसी तरह कई कारोबारियों का आयातित कच्चा चमड़ा मुंबई के बंदरगाह में अभी तक फंसा हुआ है। कारोबारियों को आशंका है कि बंदरगाह में पड़ा माल भी सड़ गया होगा। शहर की कई जूता निर्माता कंपनियां चमकदार जूता बनाने के लिए चीन से आयातित चमड़े का इस्तेमाल करते हैं। इसकी एक खेप फरवरी की शुरुआत में बंदरगाह में रोक ली गई थी। इस खेप में दोनों जिलों के करीब 50 उद्यमियों का माल था। सिर्फ इसी की कीमत 150 करोड़ रुपये के आसपास है। यदि ये भी सड़ गया होगा तो नुकसान का आंकड़ा 350 करोड़ तक पहुंच जाएगा।

केस-़1
जूता निर्माता रफत कय्यूम बताते हैं कि उनका करीब तीन करोड़ रुपये का माल मुंबई बंदरगाह पर रोक लिया गया था। इस खेप में उनके जैसे 50-60 कारोबारियों का माल था। माल को बंदरगाह में पड़े हुए काफी समय हो गया है। अब तक ये खराब हो चुका होगा। चमड़ा कारोबारियों को कच्चा माल नहीं मिलेगा तो उत्पादन प्रभावित होगा। यह भविष्य में गहरा संकट पैदा कर सकता है।

केस-2
जाजमऊ के टेनरी संचालक मोहम्मद अर्शी बताते हैं कि दो महीने से टेनरियां नहीं खुलने की वजह से वहां रखा कच्चा चमड़ा सड़ चुका है। उनका करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ। बचा खुचा माल भी सड़ने की स्थिति में है। एक तो उत्पादन ठप है। श्रमिकों की परेशानी है। उस पर माल सड़ने का नुकसान अब झेला नहीं जा रहा है।

 
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चीन से आयात ठप, विकल्प तलाश रहे कारोबारी
चर्म निर्यात परिषद के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष ओपी पांडेय बताते हैं कि कोरोना वायरस ने कानपुर और उन्नाव के चमड़ा उद्योग पर बुरा असर डाला है। चीन और कानपुर के बीच चमड़ा, चमड़ा उत्पादों और चमड़ा उत्पाद बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का आयात और निर्यात दोनों होता है। आयात ज्यादा करते हैं निर्यात कम करते हैं। चीन से आए कच्चे माल से ही यहां जूते चप्पल तैयार होते हैं। हालत ये है कि कानपुर के चमड़ा उद्योग की चीन के कच्चे माल पर व्यापक निर्भरता है। कोरोना संक्रमण से पहले हर हफ्ते चीन से दो से तीन सौ करोड़ रुपये का माल आता था। अब जूता निर्माता कंपनियों के सामने चीन से आने वाले माल का संकट बना हुआ है। कारोबारी चीन से आने वाले माल का विकल्प तलाश रहे हैं।

दोनों जिलों में ज्यादा टेनरी संचालकों और जूता निर्माताओं के यहां भारी पैैमाने पर कच्चे माल का स्टॉक रहता है। बीते दो महीने से काम न होने की वजह से खाल से चमड़ा बनाने की प्रक्रिया के दौरान वाला माल सड़ गया है। नुकसान का यह आंकड़ा 200 करोड़ है। बड़ी संख्या में कारोबारियों ने यह समस्या बताई है। सरकार से चमड़ा कारोबार को राहत पहुंचाने वाले फैसले लेने की मांग करते हैं। - जावेद इकबाल, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
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