नोट बंदी के प्रभाव से कानपुर का चमड़ा कारोबार 60 प्रतिशत घाटे में चला गया है। कच्चा माल नहीं आने और मजदूरों के वापस चले जाने से ज्यादातर टेनरियों के शटर डाउन हो गए हैं। टेनरी संचालकों का कहना है कि यदि इसी तरह से 15 दिन और स्थिति बनी रही तो कारोबार सिर्फ 20 फीसदी तक ही रह जाएगा।
कानपुर और उन्नाव क्षेत्र में चमड़े का कारोबार देश में सबसे अधिक होता है। यहां से चमड़ा और चमड़े का उत्पाद दूसरे देशों में बहुतायत मात्रा में भेजा जाता है। जिस दिन केंद्र सरकार ने नोट बंदी का आदेश जारी किया उसके दूसरे दिन से ही कारोबार में गिरावट शुरू हो गई। स्लाटर हाउसों से यह मैसेज आने लगे कि उनके पास कच्चे चमड़े के पीस नहीं हैं, ऐसे में वह टेनरियों को आपूर्ति नहीं कर पाएंगे। स्लाटर हाउस एसोसिएशन की तरफ से मैसेज जारी किया गया है कि उन लोगों को जानवर नहीं मिलने से स्थिति विकट हो गई है। कैश पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलने की वजह से पशुपालक अपने पशु स्लाटर हाउस को नहीं दे रहे हैं। चमड़ा कारोबारी और उपाध्यक्ष स्मॉल टेनर्स एसोसिएशन डा. फिरोज आलम ने कहा कि नोट बंदी से टेनरी का कारोबार चौपट हो गया है। कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। जो कुछ है, उसके लिए भी मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं। मजदूरों को मजदूरी में खुला पैसा चाहिए, जो उन्हें मिलना मुश्किल है। इसलिए वे वापस चले गए हैं। ज्यादातर मजदूर उड़ीसा और बिहार के हैं। हर टेनरी में तीन से चार हजार का टूट-फूट का काम रोजाना होता है। इसके लिए भी पर्याप्त राशि नहीं मिल पा रही है, जिससे जो काम बचा भी है, उसे भी पूरा करने में दिक्कत आ रही है। चमड़ा कारोबारी और सचिव स्मॉल टेनर्स एसोसिएशन नैयर जमाल ने कहा कि कारोबार ठप पड़ गया है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पूरी तरह से शटर डाउन हो जाएगा।
सामान्य दिनों में
6000 करोड़ का है सालाना कारोबार
17000 पीस चमड़ा रोजाना स्लाटर हाउस से टेनरियों में पहुंचता है
3000 रुपये प्रति पीस टेनरियों को मिलता है स्लाटर हाउस से चमड़ा
400 टेनरियों में होता है चमड़े का कारोबार
100000 कर्मचारी, मजदूर जुड़े हैं चमड़ा कारोबार से
जल्द ही बंद हो सकते हैं स्लाटर हाउस
उन्नाव, सहारनपुर, अलीगढ़, मेरठ और आगरा सहित देश के कई स्थानों पर स्थापित स्लाटर हाउसों के जल्द बंद होने का खतरा है। नोट बंदी की वजह से इनको जानवर मिलने में कठिनाई हो रही है। यही वजह है कि टेनरियों को स्लाटर हाउसों की तरफ से संदेश भेजा गया है कि अब वह स्थिति सामान्य होने तक चमड़ा उपलब्ध नहीं करा पाएंगे।
इन देशों को जाता है चमड़े का उत्पाद
कनाडा, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, रूस सहित करीब 10 देश