फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किडनी ट्रांसप्लांट मामला: डॉक्टर दंपती समेत चार को मिली जमानत, पढ़ें पूरा मामला

Thu, 30 Jul 2026 11:55 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा को हाईकोर्ट से और प्रिया हॉस्पिटल के संचालक व एक अन्य को जिला जज की अदालत से जमानत मिली।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अवैध किडनी ट्रांसप्लांट में आहूजा अस्पताल की मालकिन नवीननगर काकादेव निवासी डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है जबकि आरोपी राजेश कुमार व नरेंद्र सिंह को भी जिला जज अनमोल पाल की अदालत से जमानत मिल गई है।
विज्ञापन


मुखबिर की सूचना पर रावतपुर के एसआई मुकेश कुमार ने पुलिस टीम व एसीएमओ डॉ.रमित रस्तोगी ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ 31 मार्च 2026 को आहूजा अस्पताल में छापा मारकर अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का मामला पकड़ा था। अस्पताल डॉ. प्रीति के नाम रजिस्टर्ड था और डॉ. सुरजीत भी अस्पताल प्रबंधन का काम देखते थे। दोनों को जेल भेज दिया गया था। जिला जज की अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। 27 जून को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी गई है। सुनवाई के दौरान डॉक्टर दंपती की ओर से अधिवक्ता ने तर्क रखा कि इन्होंने कोई ऑपरेशन नहीं किया है। केस डायरी में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि किडनी लेने वाले ने देने वाले के बैंक खाते में कोई धनराशि हस्तांतरित की हो। कोई ठोस चिकित्सीय साक्ष्य भी केस डायरी में नहीं है। दोनों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और न ही वह किसी संगठित गिरोह के सदस्य हैं।
 

वहीं, अभियोजन की ओर से तर्क रखा गया कि आहूजा अस्पताल में ऑपरेशन के बाद अपराध छिपाने के लिए किडनी लेने व देने वालों को प्रिया अस्पताल और मेड लाइफ हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया था। सभी एक गिरोह की तरह काम करते थे। दोनों पक्षों को सुनने व केस डायरी देखने के बाद हाईकोर्ट ने डॉक्टर दंपती की जमानत याचिका मंजूर कर ली।

 
विज्ञापन

वहीं, मामले में आरोपी प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह व राजेश कुमार को भी जिला जज की अदालत से जमानत मिल गई। राजेश की भूमिका किडनी देने वाले व किडनी लेने वाले को एनस्थीसिया दिए जाने की बताई गई है। राजेश एफआईआर में नामजद नहीं था लेकिन गवाह के बयान के आधार पर उसके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई है। पुलिस ने एफआईआर में राजेश कुमार वाल्मीकि नाम दर्ज किया है जबकि उसका नाम राजेश कुमार है। वह नामजद आरोपी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें