आहूजा दंपती समेत आठ गिरफ्तार
केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की जड़ें कानपुर के अलावा लखनऊ, मेरठ,गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के बड़े निजी अस्पतालों व उनके संचालक डॉक्टरों से भी जुड़ी हुई हैं। मामले में अब तक पुलिस ने डॉक्टर सुरजीत आहूजा व उसकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
नौ अन्य आरोपी भी, पुलिस की 10 टीमें गठित
आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस के रडार पर कानपुर से लेकर दिल्ली तक के नौ अन्य आरोपी भी हैं। इनकी धरपकड़ के लिए पुलिस की 10 टीमें गठित हैं। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि कांड की तह तक पहुंचने में पुलिस के लिए आहूजा हॉस्पिटल के एक कर्मचारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी पुलिस के हाथ लगे हैं
किडनी देने और लेने वाले के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी पुलिस के हाथ लगे हैं। जिन आरोपियों की गिरफ्तारी शेष रह गई है, उनके लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। जल्द से जल्द उनकी भी गिरफ्तारी होगी।
इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी कांड
- फोटो : amar ujala
कहीं गलत होता देखें, तो पुलिस को सूचना
डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने 'अमर उजाला' के माध्यम से आमजन से अपील की है कि कहीं भी गलत होते देखें तो पुलिस को सूचना जरूर दें। सूचना देने वाले का नाम और पता गुप्ता रखा जाएगा। सूचना भ्रामक या अफवाह पर आधारित न हो इसका विशेष ध्यान रखें। डीसीपी पश्चिम ने कहा कि अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट के केस का भंडाफोड़ एक आम आदमी की सूचना के आधार पर ही हुआ।
आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी
आरोपियों ने अरेबिका को कुछ दिन कल्याणपुर के नर्सिंगहोम के आईसीयू में रखा फिर दिल्ली ले गए। दिल्ली के नर्सिंगहोम के बाद नोएडा के निजी अस्पताल में डेढ़ से दो माह के लिए उनका इलाज चला। अब तक आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी हुई है। इस अस्पताल के कुछ स्टाफ कई अधिकृत और अनधिकृत तरीके से संचालित हो रहे कल्याणपुर, काकादेव और पनकी क्षेत्र के नर्सिंगहोम से जुड़े हुए थे। वहां से मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने का खेल चल रहा था।
यूरोलॉजी के लिए अधिकृत नहीं
सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि आहूजा अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा नहीं है। नर्सिंगहोम और आईसीयू जरूर बने हैं लेकिन अस्पताल यूरोलॉजी के लिए अधिकृत नहीं हैं। ऐसे में गुर्दे और उससे जुड़ी सर्जरी होने का सवाल ही नहीं है। किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली टीम अपने साथ कई औजार लेकर आती थी जबकि ऑपरेशन थियेटर के दो टेबलों का उपयोग किया जाता था।
शहर के सर्जनों से होगी पूछताछ
आहूजा अस्पताल में अपनी सेवाएं देने वाले शहर के सर्जनों से भी पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पूछताछ करेगी। इन सर्जन पर किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद रोगियों के इलाज करने और इस बात को छुपाने का आरोप है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आहूजा अस्पताल के पास किडनी ट्रांसप्लांट करने और ट्रांसप्लांट के रोगी का इलाज करने की अनुमति नहीं होने के बावजूद इन डॉक्टरों ने उन दोनों रोगियों का इलाज किया। ऐसे में ये सभी डॉक्टर पूछताछ के दायरे में आएंगे।
स्टाफ को छुट्टी देकर देर रात किया जाता था ट्रांसप्लांट
मसवानपुर चौराहा स्थित आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट देर रात या सुबह के तीन से चार बजे के बीच होता था। यह वह समय था जब अधिकतर मरीज व तीमारदार नींद में होते थे। सर्जरी के बाद किडनी रोगी व डोनर को शिफ्ट करना आसान रहता था। किडनी प्रत्यारोपण वाले दिन पूरे स्टाफ को छुट्टी दे दी जाती थी।
मेरठ और नोएडा के डॉक्टरों व पैरामेडिकल टीम रहती थी
यह जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों को जांच में मिली है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए देर रात का समय निर्धारित किया जाता था। इस दौरान सभी स्टाफ की छुट्टी कर दी जाती थी। केवल मेरठ और नोएडा के डॉक्टरों व पैरामेडिकल टीम रहती थी। सर्जरी के बाद किडनी रोगी और डोनर को अलग-अलग अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता था। इस बीच अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते थे।