मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार होता है
इसका असर तुरंत दिखाई देता है और मरीजों के मन से आत्महत्या का ख्याल हट जाता है। यह थैरेपी अमेरिका और अन्य देशों में भी अपनाई जा रही है। डॉ. चौधरी ने बताया कि धुंध-कोहरे के कारण मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का संतुलन बिगड़ता है, जिससे सिरकाडियन रिदम प्रभावित होता है और नींद-जागने का पैटर्न टूट जाता है। विभाग में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए उनकी दवाओं की खुराक समायोजित की जा रही है। जिन मरीजों में आत्महत्या प्रवृत्ति की पुष्टि होती है, उन्हें विशेष रूप से यह थैरेपी दी जाती है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार होता है।