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केटामाइन थैरेपी: एक खुराक से ही दूर खुदकुशी का ख्याल, GSVM ने 30 रोगियों का विवरण किया तैयार, पढ़ें डिटेल

Wed, 31 Dec 2025 11:09 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग ने कैटामीन थैरेपी के जरिए कोहरे और ठंड के कारण अवसादग्रस्त हुए 30 मरीजों के मन से आत्महत्या के विचार खत्म करने में सफलता पाई है। बता दें कि यह थैरेपी मस्तिष्क में न्यूरोकेमिकल संतुलन को तुरंत सुधारती है।
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केटामाइन थैरेपी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में गलन भरी ठंड और धुंध-कोहरे के मौसम में अवसाद के रोगियों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ने लगी है। इस स्थिति में केटामाइन थैरेपी कारगर साबित हो रही है। केटामाइन की खुराक देते ही रोगी के दिमाग से आत्महत्या का ख्याल ही गायब हो जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की केटामाइन क्लीनिक में अब तक 30 रोगियों का विवरण तैयार किया गया है।

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मनोरोग विभागाध्यक्ष एवं प्रो. डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि धुंध और कोहरे में धूप के अभाव से न्यूरोकेमिकल संतुलन बिगाड़ता है, जिससे अवसाद गहरा होता है और आत्महत्या का खतरा बढ़ता है। कई मरीज ऐसे भी हैं जिनका रोग पता नहीं है और इलाज नहीं चल रहा, ऐसे लोगों के लिए यह मौसम गंभीर ट्रिगर फैक्टर बन सकता है। उन्होंने बताया कि थैरेपी में केटामाइन दवा की .5 मिलीग्राम की खुराक दी जाती है।

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मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार होता है
इसका असर तुरंत दिखाई देता है और मरीजों के मन से आत्महत्या का ख्याल हट जाता है। यह थैरेपी अमेरिका और अन्य देशों में भी अपनाई जा रही है। डॉ. चौधरी ने बताया कि धुंध-कोहरे के कारण मेलाटोनिन और सेरोटोनिन का संतुलन बिगड़ता है, जिससे सिरकाडियन रिदम प्रभावित होता है और नींद-जागने का पैटर्न टूट जाता है। विभाग में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए उनकी दवाओं की खुराक समायोजित की जा रही है। जिन मरीजों में आत्महत्या प्रवृत्ति की पुष्टि होती है, उन्हें विशेष रूप से यह थैरेपी दी जाती है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार होता है।
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