जब ट्रायल नहीं हुआ, तो चयन प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक
खिलाड़ियों का आरोप है कि उन्हें बाद में पता चला कि टीम भेजी जा चुकी है। कई खिलाड़ी खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाने से भविष्य में उनके अवसर प्रभावित हो सकते हैं। जिला पावरलिफ्टिंग संघ के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें न तो ट्रायल और न ही टीम गठन की जानकारी दी गई। प्रतियोगिता के संबंध में भी उन्हें नहीं बताया गया। जब ट्रायल नहीं हुआ, तो चयन प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खिलाड़ियों को प्रतिभा साबित करने का अवसर मिलना चाहिए।
बिना ट्रायल दिए ही शामिल हुए अशोक मौर्या
ट्रायल के बाद आठ सितंबर को उत्तर प्रदेश पावरलिफ्टिंग एसोसिएशन के सचिव राहुल कुमार शुक्ला की ओर से जारी लिस्ट में अशोक मौर्या शामिल भी नहीं थे जबकि दिल्ली में हुई प्रतियोगिता में उनको स्थान दिया गया। इसको लेकर अन्य खिलाड़ियों में विरोध है। उनका कहना है कि जब ट्रायल नहीं दिया तो उन्हें टीम में किस हक से शामिल किया गया।
अशोक मौर्या ट्रायल में आने में असमर्थ थे लेकिन जयपुर में हुई पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में श्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन किया गया है। -राहुल कुमार शुक्ला, सचिव उप्र पावरलिफ्टिंग एसोसिएशन
चयन प्रक्रिया पर पहले भी उठे सवाल
- वर्ष 2026 में सीएसजेएमयू में खेलो इंडिया प्रोग्राम के तहत फुटबॉल टीम के चयन को लेकर खिलाड़ियों ने भेदभाव और अनियमितता के आरोप लगाए थे। स्थानीय फुटबॉल खिलाड़ियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें मुख्य चयन प्रक्रिया से बाहर कर बाहरी खिलाड़ियों को टीम में जगह दी गई।
- वर्ष 2021 के अंत में एजीएम बैठक से ठीक पहले जल्दबाजी में प्रदेश की रणजी टीम की घोषणा कर दी थी। इस मामले में सबसे बड़ा विवाद यह था कि टीम के खिलाड़ियों का कोई औपचारिक चयन ट्रायल नहीं कराया गया था।