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तड़प-तड़पकर हो जाती है मौत
बेहटा-गंभीरपुर के इस गौ-आश्रय स्थल में कुल 105 गोवंश मौजूद हैं, जिनकी देखरेख के लिए तीन केयरटेकर नियुक्त हैं। इसके बावजूद हालात यह दर्शाते हैं कि जो गोवंश एक बार दलदल में गिर जाता है। उसे उठाने की जहमत कोई नहीं उठाता और कुछ ही दिनों में तड़प-तड़पकर उसकी मौत हो जाती है। बीमार गोवंशों की आंखों की बेबसी और उनके मुंह से निकलता फेन, जमीनी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही को उजागर करता है, जो मुख्यमंत्री की इस प्राथमिकता वाली योजना पर पानी फेर रहे हैं।