डॉ. प्रीति फिजीशियन है और डॉ. सुरजीत पैथोलॉजिस्ट हैं
जांच कमेटी में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मेहरोत्रा और सचिव डॉ. शालिनी मोहन हैं। कमेटी प्रकरण में आंतरिक जांच करेगी। डॉ. शालिनी ने कहा कि प्रकरण का निष्कर्ष आ जाए और वे दोषी पाए जाते हैं तो जो कानूनन सही होगा वही एक्शन लिया जाएगा। डॉ. प्रीति फिजीशियन है और डॉ. सुरजीत पैथोलॉजिस्ट। इनमें कोई सर्जन नहीं है। ये दोनों ही किडनी प्रत्यारोपण नहीं कर सकते। बैठक में पूर्व आईएमए अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी, डॉ. पंकज गुलाटी और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
हॉस्पिटल से बरामद माल और दस्तावेज
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हो सकती है ये सजा
किडनी कांड रैकेट के आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 की धारा 18, 19, 20 एवं बीएनएस की 143 और 3 ( 5 ) की धाराएं लगाई गई हैं। धारा 18 अवैध रूप से मानव अंग निकालने से संबंधित है। इसमें 10 साल तक की कैद और 20 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। धारा 19 में इसमें किसी को मानव अंग देने के लिए रजामंद करने पर दस साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
लाइसेंस भी हो सकता है रद्द
धारा 20 में पांच साल तक की सजा या 20 लाख तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। मेडिकल प्रोफेशनल (डॉक्टर आदि ) शामिल होने पर उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। वहीं बीएनएस की धारा 143 में एक से अधिक व्यक्तियों का दुर्व्यापार करने वाले को उम्र कैद और जुर्माना से भरना पड़ सकता है। धारा 3 ( 5 ) सामूहिक आपराधिक दायित्व को बताती है।