4000 हेक्टेयर में स्थित 23 गांवों में किया गया ट्रायल
डाटा अपलोड करने के बाद पानी कितने क्षेत्र में बढ़ेगा, ऊंची-नीची जमीन के अनुसार नुकसान का आकलन और किस क्षेत्र में कितना पानी भरेगा, यह भी पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि एप में डाटा अपलोड करने के बाद इन सभी बिंदुओं की सटीक जानकारी मिल सकेगी। कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने कहा कि आईआईटी के एप की मदद से प्रदेश के बाढ़ प्रभावित 48 जिलों को लाभ मिलेगा। इसको लेकर शासन से भी बात की जाएगी। प्रो. सिन्हा ने बताया कि एप का सफल ट्रायल बैराज के पास करीब 4000 हेक्टेयर में स्थित 23 गांवों में किया गया है।
रिमोट सेंसिंग के आधार पर लिया जाता था डाटा
यह ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा है। आठ माह की लगातार रिसर्च के बाद यह एप विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण डाटा है। अभी तक रिमोट सेंसिंग के आधार पर डाटा लिया जाता था जो पांच मीटर के अंतराल पर एनालिसिस के लिए आता है। एप में ड्रोन की मदद से लिए गए डाटा तीन सेमी के अंतराल पर एनालिसिस कर देते हैं। इस एप को तैयार करने के लिए आईआईटी के वैज्ञानिकों ने ड्रोन और रिमोट सेंसिंग के डाटा को एनालिसिस कर डिजिटल एलिवेशन मॉडल विकसित किया है।