फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऑक्सीजन संकट का कारण अस्पतालों में प्राणवायु की बर्बादी, कानपुर आईआईटी की रिपोर्ट में खुलासा

Tue, 18 May 2021 02:15 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर

सार

कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी की सबसे बड़ी वजह अस्पताल हैं। प्रदेश भर के अस्पतालों में जाने-अनजाने में 20 से 25 फीसदी ऑक्सीजन बर्बाद हुई है। ऐसा हम नहीं कानपुर आईआईटी की रिपोर्ट कह रही है।
विज्ञापन
ऑक्सीजन सिलिंडर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना महामारी के बीच ऑक्सीजन संकट का मुख्य कारण अस्पतालों में इसकी बर्बादी होना भी है। प्रदेश भर के अस्पतालों में जाने-अनजाने में 20 से 25 फीसदी ऑक्सीजन बर्बाद हुई। अगर ऐसा न होता तो काफी मरीजों की जान भी बच जाती। यह खुलासा आईआईटी के ऑक्सीजन ऑडिट सिस्टम एप से हुआ है।  
विज्ञापन


इस बार ऑक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में संक्रमितों की मौतें हुई हैं। ऑक्सीजन संकट की वजह जानने के लिए प्रदेश सरकार ने आईआईटी से ऑक्सीजन ऑडिट सिस्टम एप तैयार करवाया था। 20 दिन पहले प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को 54 सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन ऑडिट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनमें शहर के हैलट, रामा और उर्सला अस्पताल भी हैं।
विज्ञापन

रोज के रोज हर अस्पताल की तैयार हुई रिपोर्ट में 20 से 25 फीसदी ऑक्सीजन की बर्बादी सामने आई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों का इसमें सीधा दोष नहीं है। अधूरी तैयारी और अज्ञानता की वजह से ही यह समस्या बढ़ती गई। आईआईटी को सभी अस्पतालों की समग्र रिपोर्ट तैयार करनी है। इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहे आईआईटी के प्रो. मणींद्र अग्रवाल का कहना है कि ऑक्सीजन की बर्बादी की रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी। 

इस तरह हुई बर्बादी 
- अगर कोई मरीज ऑक्सीजन पर है और उसे पानी पीना या खाना खाना है तो वह मास्क हटा देता है लेकिन ऑक्सीजन तब भी चलती रहती है। ऐसे में काफी ऑक्सीजन बर्बाद हुई। 
- रिपोर्ट में पता चला है कि अस्पतालों में जब मरीज का बेड बदला जाता है तब भी ऑक्सीजन सिलिंडर को बंद नहीं किया जाता है। इससे काफी ऑक्सीजन बर्बाद हुई।
- कई अस्पतालों में ऑक्सीजन लीक होने की भी बात सामने आई है। 

तकनीक रोकेगी बर्बादी
रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि मास्क या ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था को तकनीकी से जोड़ा जाए। सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग करके ऐसी तकनीक बनाई जाए कि जब भी मरीज का मास्क गलती से निकल जाए या वह मास्क हटाए तो ऑटोमैटिक ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो जाए। सिलिंडर लीक होेने पर ऑक्सीजन सप्लाई रुक जाए, इसके लिए भी तकनीक बनाई जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें