दो साल में सौ से अधिक ठगी
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह करीब दो वर्षों से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। किसी को ब्लैकमेल करके, तो किसी के खाते का विवरण व ओटीपी हासिल कर रकम पार करते थे। इस तरह से करोड़ों रुपये पार किए। चूंकि आरोपी फेक आईडी के सिमों का इस्तेमाल करते थे। इसलिए इनको ट्रेस करना पुलिस के लिए मुश्किल होता था।
रकम आते ही अलग-अलग खातों में करते थे ट्रांसफर
आरोपी जब ठगी करते थे तो रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे। एटीएम से रकम निकाल लेते थे। इसलिए रिकवरी नहीं हुई। जो खाते इस्तेमाल करते थे, वे फेक आईडी पर होते थे। किसी मजदूर, रिक्शा चालक आदि के खाते किराये पर भी लेते थे।
सावधानी बरतें, शिकार होने से बचें
- सोशल मीडिया पर किसी अनजान शख्स से दोस्ती न करें।
- अनजान शख्स अगर वीडियो कॉल के लिए आमंत्रित करें तो सतर्क हो जाएं।
- किसी तरह की लॉटरी, डिस्काउंट के फेर में पड़कर खाते की जानकारी साझा न करें।
- फोन पर कभी भी किसी शख्स को बैंक खाते संबंधी जानकारी न दें।
- अनजान ई-मेल का रिस्पांस न दें, अनजान लिंक पर भी क्लिक न करें।
- अगर ठगी हो, तो जल्द से जल्द 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।