कानपुर शहर में भीषण गर्मी लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। हैलट और उर्सला अस्पतालों की मानसिक रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के कारण लोगों में गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ा है। दोनों अस्पतालों में प्रतिदिन 100 से 150 मरीज आ रहे हैं।
इनमें से 50-50 मरीज गुस्से और चिड़चिड़ेपन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। उर्सला अस्पताल के डॉ. चिरंजीवी प्रसाद ने नींद की कमी को इसका मुख्य कारण बताया। रात में गर्मी और उमस से नींद पूरी नहीं हो पाती है। मस्तिष्क को पर्याप्त आराम न मिलने से स्वभाव में चिड़चिड़ापन आता है। काम के दबाव के साथ गर्मी लोगों को हिंसक बना रही है।
गुस्सा अनियंत्रित होने पर विशेषज्ञ से परामर्श करें
डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि पानी की कमी से बचें और ठंडे वातावरण में रहें। कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लेना आवश्यक है। गुस्सा अनियंत्रित होने पर विशेषज्ञ से परामर्श करें। पर्याप्त पानी, छाछ या नींबू पानी पीएं और गरिष्ठ भोजन से बचें। दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें तथा प्राणायाम करें।