अपनी इस उपलब्धि के कारण वे कई बार चर्चा में रहे और कानपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। स्थानीय लोग उन्हें उनकी विशिष्ट पहचान के लिए याद करते हैं। परिवार में वे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटे को छोड़ गए हैं। रविवार दोपहर उनका अंतिम संस्कार भगवत दास घाट पर परिजनों और रिश्तेदारों की उपस्थिति में किया गया, जहां लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।